भारत का पैसेंजर इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट साल के अंत तक **10%** हिस्सेदारी हासिल करने के करीब है। सितंबर में **36,108** यूनिट्स की बिक्री के साथ बाजार में जबरदस्त उछाल देखा गया है, हालांकि इंफ्रास्ट्रक्चर और लागत की चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर एक बड़े माइलस्टोन की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सितंबर 2026 के डेटा के मुताबिक, कुल ईवी रिटेल सेल्स 3,33,634 यूनिट्स रही, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 74% की बड़ी उछाल है। अकेले पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में 36,108 यूनिट्स बिकने से पैठ 8.5% तक पहुंच गई है।
नई ऊर्जा, नई पसंद
अगर 'न्यू एनर्जी व्हीकल' कैटेगरी (बैटरी ईवी + स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड) को देखें, तो सितंबर में इनका मार्केट शेयर 10.5% के स्तर को पार कर चुका है। फेस्टिव सीजन की डिमांड, नए मॉडल और कुल लागत (TCO) कम करने की कोशिशों ने ग्राहकों को ईवी की ओर आकर्षित किया है। उदाहरण के तौर पर, JSW MG Motor India की होलसेल वॉल्यूम में 19% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई और कंपनी ने कुल 8,018 यूनिट्स बेचीं।
निवेशक क्यों हैं सतर्क?
तेजी के बावजूद, मास अडॉप्शन में कुछ बड़े रोड़े हैं:
- इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: पब्लिक चार्जिंग नेटवर्क अभी सिर्फ बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित हैं, जिससे दूरदराज के इलाकों में 'रेंज एंग्जायटी' बनी रहती है।
- लागत का गणित: मास मार्केट को लुभाने के लिए ईवी की कीमत ₹10 लाख से कम होनी चाहिए। इसके लिए बैटरी लोकलाइजेशन और सप्लाई चेन मैनेजमेंट बहुत जरूरी है।
अगले कुछ महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां चार्जिंग गैप को भरने और अफोर्डेबल मॉडल्स लाने में कितनी सफल होती हैं।
