भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बिक्री ने अगस्त में नया रिकॉर्ड बनाया है। रिटेल बिक्री **2,98,448** यूनिट्स तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के मुकाबले **52.9%** ज्यादा है। खास बात यह है कि पहली बार वैकल्पिक ईंधन (EV, हाइब्रिड और CNG) वाली कारों ने पेट्रोल कारों को पछाड़ दिया है, लेकिन नई सरकारी स्कीम PM E-DRIVE की सख्त शर्तों ने कंपनियों के सामने चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं।
बाजार में बड़ा बदलाव
अगस्त 2026 में भारतीय बाजार में एक बड़ा स्ट्रक्चरल शिफ्ट देखने को मिला है। अगस्त 2025 में जहां EV पेनिट्रेशन 9.5% था, वहीं अब यह बढ़कर 12.3% पर पहुंच गया है। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट से आया है, जहां अल्टरनेटिव-फ्यूल वाहनों (इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और CNG) ने 41.95% मार्केट शेयर पर कब्जा जमा लिया है, जो कि पेट्रोल गाड़ियों से ज्यादा है।
सेगमेंट के अनुसार प्रदर्शन
- इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर: कुल 1,83,204 यूनिट्स के साथ यह सेगमेंट सबसे आगे रहा, जिसमें सालाना 67.05% की बढ़त देखी गई।
- इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल: यहां भी तेजी दिखी और बिक्री 4,702 यूनिट्स के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई।
- पैसेंजर EV: इसमें 52% का इजाफा हुआ और कुल 30,696 यूनिट्स बिकीं। इसमें Tata Motors का दबदबा कायम है, जिसका मार्केट शेयर 43.8% है।
नई सरकारी चुनौती: PM E-DRIVE
बढ़ती बिक्री के बीच, कंपनियों के लिए 1 सितंबर, 2026 से नई मुसीबतें शुरू हो गई हैं। सरकार की PM E-DRIVE स्कीम के तहत अब 'लोकलाइजेशन' (Localization) के नियम सख्त कर दिए गए हैं। कंपनियों को अब ट्रैक्शन मोटर्स में इस्तेमाल होने वाले रेयर-अर्थ मैग्नेट्स जैसे क्रिटिकल कंपोनेंट्स को स्थानीय स्तर पर ही तैयार करना होगा।
निवेशकों के लिए यह सतर्क रहने का समय है। हालांकि डिमांड मजबूत है, लेकिन सप्लाई चेन में बदलाव और नई मैन्युफैक्चरिंग शर्तों को पूरा करने का सीधा असर कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margin) पर पड़ सकता है। जो कंपनियां असेंबली-हैवी मॉडल पर निर्भर हैं, उनके मुनाफे पर आगे चलकर दबाव देखा जा सकता है।
