अगस्त 2026 में भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर जबरदस्त रफ्तार से आगे बढ़ा है। हालांकि, त्योहारों के चलते RTO दफ्तरों में छुट्टी होने की वजह से मंथली सेल्स में **12%** की मामूली गिरावट आई है, लेकिन सालाना आधार पर यह **51%** का बड़ा जंप है।
बाजार की चाल और प्रशासनिक बाधाएं
अगस्त 2026 में सालाना आधार पर 51% की ग्रोथ के बाद भी बाजार में मंथली तौर पर 12% की सुस्ती दिखी। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसकी मुख्य वजह ओणम और रक्षाबंधन के दौरान RTO दफ्तरों का बंद रहना है, जिससे गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अटक गई। इसे कोई बड़ी मंदी नहीं, बल्कि कैलेंडर-आधारित देरी माना जा रहा है।
टू-व्हीलर मार्केट में 'Legacy' प्लेयर्स का दबदबा
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में कुल सेल्स 1,60,000 से 1,80,569 यूनिट्स के आसपास रही। एक बड़ा ट्रेंड यह देखने को मिला है कि ग्राहक अब EV-स्टार्टअप्स के बजाय पुरानी और भरोसेमंद कंपनियों (Legacy players) पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। TVS Motor Company और Bajaj Auto की संयुक्त मार्केट शेयर अब 50% से ऊपर निकल चुकी है, जबकि शुरुआती EV स्टार्टअप्स की सेल्स में गिरावट आई है।
फोर-व्हीलर में Tata Motors का राज
पैसेंजर व्हीकल कैटेगरी में कुल 30,325 गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हुआ। Tata Motors ने 42.8% मार्केट शेयर के साथ अपनी बादशाहत कायम रखी है, जिसकी कुल 12,983 यूनिट्स अगस्त में रजिस्टर हुईं। वहीं, Mahindra & Mahindra और JSW MG Motor भी तेजी से अपनी कैपेसिटी बढ़ा रहे हैं।
नई पॉलिसी और लोकलाइजेशन का असर
PM E-Drive सब्सिडी स्कीम को 2028 तक बढ़ाए जाने से निवेशकों का सेंटिमेंट पॉजिटिव है। हालांकि, 1 सितंबर 2026 से ट्रैक्शन मोटर्स के लिए लागू हुए नए 'लोकलाइजेशन' नियमों ने कंपनियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इससे कमर्शियल व्हीकल मेकर्स के मार्जिन पर अल्पकालिक असर पड़ सकता है, जिस पर निवेशकों को बारीक नजर रखनी चाहिए।
