फाइनेंशियल ईयर 2027 की धमाकेदार शुरुआत
फाइनेंशियल ईयर 2027 की शुरुआत भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार के लिए काफी दमदार रही। अप्रैल 2026 में कंज्यूमर एडॉप्शन में गजब की तेज़ी देखी गई, खासकर टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेक्टर्स में। भारतीय ऑटो मार्केट के इस पॉजिटिव ट्रेंड के पीछे स्थिर कंज्यूमर कॉन्फिडेंस और पिछले साल के मजबूत बेस का असर बताया जा रहा है। हालांकि, भविष्य में कुछ बड़ी आर्थिक चुनौतियां इस ग्रोथ को धीमा कर सकती हैं।
रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन: टू-व्हीलर्स और कारों का जलवा
अप्रैल 2026 में EV मार्केट ने शानदार शुरुआत करते हुए कुल 2.39 लाख यूनिट्स का आंकड़ा पार किया। यह अप्रैल 2025 में दर्ज 1.69 लाख यूनिट्स के मुकाबले 41.4% की बड़ी उछाल है। सभी सेक्टर्स में ग्रोथ देखने को मिली। सबसे बड़े सेगमेंट, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री 21% बढ़कर 1.49 लाख यूनिट्स पर पहुंच गई। वहीं, इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट में 40% से ज़्यादा की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई, जो 23,227 यूनिट्स तक पहुंच गई। इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स में भी 22% की बढ़ोतरी हुई और यह 64,500 यूनिट्स पर रहा।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री में TVS Motor Company 35,980 रजिस्ट्रेशन के साथ सबसे आगे रही, इसके बाद Bajaj Auto (31,083) और Ather (25,861) का नंबर आया। इलेक्ट्रिक कारों में Tata Motors 8,501 रजिस्ट्रेशन के साथ पहले स्थान पर रही, जबकि Mahindra & Mahindra (5,174) और JSW MG Motor India (4,978) पीछे रहीं। नए खिलाड़ी Maruti Suzuki ने भी 1,222 सेल्स दर्ज कीं।
सरकारी सब्सिडी, खासकर PM E-DRIVE स्कीम, इस ग्रोथ का एक बड़ा सहारा बनी हुई है। इससे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स जुलाई 2026 तक और इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स मार्च 2028 तक अधिक किफायती बने रहेंगे, जिससे कंज्यूमर डिमांड और मैन्युफैक्चरर कॉन्फिडेंस को बढ़ावा मिल रहा है।
मार्केट की हकीकत और कड़ी कॉम्पिटिशन
अप्रैल के EV आंकड़े भले ही मज़बूत दिख रहे हों, लेकिन बाज़ार की हकीकत थोड़ी अलग है। अप्रैल 2026 में भारतीय ऑटो रिटेल सेक्टर में भी अच्छी पकड़ देखी गई, जिसमें टू-व्हीलर्स और पैसेंजर व्हीकल्स ने बढ़त दर्ज की। इसका एक कारण अच्छी रूरल फाइनेंसियल हेल्थ और फार्म कंडीशंस को माना जा रहा है। Maruti Suzuki ने अपनी अब तक की सबसे अच्छी मंथली पैसेंजर व्हीकल सेल्स (+35%) रिपोर्ट की, और Tata Motors Passenger Vehicles की सेल्स 30.5% बढ़ी। कारों के लिए इस जनरल ऑप्टिमिज्म के बावजूद, EVs के लिए कुछ खास चुनौतियां भी हैं।
ICRA का अनुमान है कि पैसेंजर व्हीकल्स और टू-व्हीलर्स सेगमेंट में जल्द ही लो-टू-मिड सिंगल-डिजिट की सालाना ग्रोथ देखने को मिलेगी। उनका मानना है कि EV डिमांड को इसलिए भी बढ़ावा मिल रहा है क्योंकि कंज्यूमर्स बढ़ते तेल के दामों के चलते पेट्रोल (ICE) व्हीकल्स से दूरी बना रहे हैं। Ather Energy जैसी कंपनियाँ, जिन्होंने अगस्त 2024 में $71.4 मिलियन की फंडिंग जुटाकर यूनिकॉर्न स्टेटस हासिल किया था, आगे की ग्रोथ की योजना बना रही हैं। Ather ने 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹2,310 करोड़ का सालाना रेवेन्यू रिपोर्ट किया है। हालांकि, बाज़ार में कॉम्पिटिशन बेहद कड़ी है। टॉप इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता Ola Electric के IPO वैल्यूएशन में पहले के प्राइवेट फंडिंग राउंड की तुलना में करीब $4 बिलियन की गिरावट आई है।
कार मार्केट में Tata Motors (मार्केट कैप ~₹3.42 लाख Cr, PE ~14.2x) और Maruti Suzuki (मार्केट कैप ~₹4.18 लाख Cr, PE ~29.08x) प्रमुख प्लेयर हैं। वहीं, टू-व्हीलर्स में TVS Motor (मार्केट कैप ~₹1.11 लाख Cr, PE ~60.50x) और Bajaj Auto (मार्केट कैप ~₹1.34 लाख Cr, PE ~35.70x) बड़ी कंपनियों में शुमार हैं।
भविष्य की ग्रोथ के लिए बड़े खतरे
मज़बूत रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों के बावजूद, भारत के EV मार्केट की निरंतर ग्रोथ पर कई बड़े खतरे मंडरा रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता है संभावित खराब मॉनसून सीजन का असर। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, अल नीनो के कारण सामान्य से कम बारिश हो सकती है, जिससे फार्म आउटपुट और रूरल डिमांड पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। व्हीकल सेल्स, खासकर टू-व्हीलर्स के लिए, रूरल डिमांड एक बेहद ज़रूरी फैक्टर है।
मौसम की चिंताओं के अलावा, बढ़ती इनपुट कॉस्ट भी एक बड़ा मुद्दा है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण फ्यूल प्राइसेस में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे मैन्युफैक्चरर्स और किसानों दोनों के लिए रॉ मैटेरियल्स की लागत बढ़ जाएगी। भारत का लिथियम-आयन बैटरी सेल्स और अन्य ज़रूरी मिनरल्स के आयात पर निर्भर होना, सप्लाई चेन में भी वल्नरेबिलिटीज़ पैदा करता है। ग्लोबल सप्लाई में किसी भी तरह की गड़बड़ या कीमतों में उतार-चढ़ाव इस सेक्टर को प्रभावित कर सकता है।
सितंबर 2026 से इलेक्ट्रिक ट्रक्स के लिए ज़रूरी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स के डोमेस्टिक प्रोडक्शन की नई गाइडलाइंस मैन्युफैक्चरर्स के लिए अल्पावधि में लागत बढ़ा सकती हैं। वहीं, कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते प्रोडक्शन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश की ज़रूरत पड़ेगी, जो नए खिलाड़ियों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली की ड्राफ्ट EV पॉलिसी ₹30 लाख से महंगी कारों पर टैक्स एग्जम्प्शन सीमित कर सकती है, जो प्रीमियम EV की अफोर्डेबिलिटी को प्रभावित कर सकती है।
EV सेक्टर का आगे का रास्ता
आगे चलकर, ICRA का अनुमान है कि एक मज़बूत फाइनेंशियल ईयर 2026 के बाद, पैसेंजर व्हीकल और टू-व्हीलर सेगमेंट्स में सालाना लो-टू-मिड सिंगल-डिजिट की ग्रोथ जारी रहेगी। कंज्यूमर्स की पसंद EVs की ओर बढ़ रही है, जिसका एक बड़ा कारण वोलेटाइल ऑयल प्राइसेस के चलते ईंधन की अनिश्चित कीमतें हैं, जिससे EV एडॉप्शन को सपोर्ट मिलता रहेगा। हालांकि, इस सेक्टर का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि यह आने वाली रूरल आर्थिक चुनौतियों से कैसे निपटता है, बढ़ती लागतों को कैसे मैनेज करता है, और सप्लाई चेन व इंफ्रास्ट्रक्चर को कैसे विकसित करता है।
