बाजार की चाल: YoY ग्रोथ मजबूत, पर Sequential धीमा
भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर ने जनवरी 2026 में साल-दर-साल (YoY) 28% की शानदार ग्रोथ हासिल की है, जिसमें कुल 2,19,109 यूनिट्स की रिटेल बिक्री दर्ज हुई। यह आंकड़े पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में एक मजबूत उछाल दिखाते हैं। वहीं, दिसंबर 2025 की तुलना में ग्रोथ की गति थोड़ी कम हुई है, जिससे पता चलता है कि बाजार अपने Gains को consolidate कर रहा है और अब यह मुख्य रूप से डिमांड-ड्रिवेन (Demand-Driven) बन रहा है, न कि केवल सब्सिडी पर निर्भर।
पैसेंजर व्हीकल (PV) में दमदार परफॉर्मेंस, पर पिछला महीना रहा धीमा
इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट ग्रोथ का एक बड़ा इंजन बनकर उभरा है। जनवरी 2026 में इनकी बिक्री साल-दर-साल 54.75% बढ़कर 18,470 यूनिट्स तक पहुंच गई। इससे PV सेगमेंट में EV का पेनेट्रेशन बढ़कर 3.6% हो गया, जो एक साल पहले 2.5% था। Tata Motors ने 8,007 यूनिट्स के साथ अपनी मार्केट लीड बरकरार रखी। हालांकि, दिसंबर 2025 के मुकाबले इस सेगमेंट में 23.59% की गिरावट दर्ज की गई, जो दिखाता है कि सालाना मजबूत प्रदर्शन के बावजूद, नियर-टर्म डायनामिक्स में सामान्यीकरण हो रहा है।
ई3W और ई2W: YoY ग्रोथ अच्छी, पर Sequential गिरावट
इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (E3W) की बिक्री में साल-दर-साल 26.43% की वृद्धि देखी गई और यह 75,767 यूनिट्स पर पहुंच गई। यह सेगमेंट 59.6% के साथ EV पेनेट्रेशन में सबसे आगे है, जिसका मुख्य कारण कुल-लागत-लाभ (Total Cost of Ownership) है, खासकर लास्ट-माइल डिलीवरी के लिए। Bajaj Auto 8,510 यूनिट्स के साथ इस सेगमेंट में आगे रही। इसी तरह, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) की बिक्री, जो कुल EV वॉल्यूम का सबसे बड़ा हिस्सा है, साल-दर-साल 24.77% बढ़कर 1,22,812 यूनिट्स पर पहुंच गई। TVS Motor Company 34,558 यूनिट्स के साथ E2W सेगमेंट में टॉप पर रही। इन मजबूत सालाना आंकड़ों के बावजूद, E3W और E2W दोनों सेगमेंट में दिसंबर की तुलना में क्रमशः 14.16% और 26.09% की गिरावट आई है।
ई-सीवी: नई इलेक्ट्रीफिकेशन की शुरुआत
इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स (e-CVs) ने सबसे चौंकाने वाली ग्रोथ दिखाई है, जिनकी बिक्री साल-दर-साल 115.5% बढ़कर 2,060 यूनिट्स हो गई। यह उछाल फ्लीट (Fleet) इलेक्ट्रीफिकेशन की शुरुआती चरणों का संकेत देता है, खासकर इंट्रा-सिटी लॉजिस्टिक्स में।
डिमांड-ड्रिवेन मार्केट की ओर बढ़ता कदम
FADA (Federation of Automobile Dealers Associations) के प्रेसिडेंट C.S. Vigneshwar ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का EV इकोसिस्टम 'स्ट्रक्चरली पॉजिटिव मैनर' (Structurally Positive Manner) में विकसित हो रहा है और जनवरी का प्रदर्शन इस बात की पुष्टि करता है कि बदलाव 'फर्मली डिमांड-लेड' (Firmly Demand-Led) है, न कि सब्सिडी पर निर्भर। इसका मतलब है कि ग्राहक अब प्रोडक्ट-मार्केट फिट, टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप और अवेलेबिलिटी को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं, जो बाजार के परिपक्व होने के संकेत हैं।
वैल्यूएशन और कॉम्पिटिशन की चुनौतियाँ
बाजार में मजबूत YoY ग्रोथ के बावजूद, प्रमुख EV प्लेयर्स के स्टॉक वैल्यूएशन को बाजार के ट्रेंड्स के संदर्भ में देखने की जरूरत है। Tata Motors, M&M, Bajaj Auto और TVS Motor जैसे प्लेयर्स के P/E रेश्यो (Price-to-Earnings ratio) क्रमशः लगभग 25x, 18x, 30x और 28x के आसपास हैं। EV की मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन सीक्वेंशियल सेल्स में नरमी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा भविष्य की कमाई पर दबाव डाल सकती है।
भविष्य की राह: Pragmatic Adoption का दौर
FADA का अनुमान है कि भारत 'प्रैगमेटिक EV एडॉप्शन' (Pragmatic EV Adoption) के एक 'डिसीसिव मल्टी-ईयर फेज' (Decisive Multi-Year Phase) में प्रवेश कर रहा है। यह आउटलुक इकोनॉमिक्स, EV इकोसिस्टम के परिपक्व होने और ग्राहकों के बढ़ते भरोसे पर टिका है, न कि केवल पॉलिसी सपोर्ट पर। जैसे-जैसे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ेगा और OEM (Original Equipment Manufacturers) अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को गहरा करेंगे, फोकस ऑपरेशनल एफिशिएंसी, कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस और सस्टेनेबल डिमांड पर शिफ्ट होगा।