भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) की रिटेल बिक्री जून में पिछले साल के मुकाबले **63%** बढ़कर **3.06 लाख** यूनिट्स से अधिक हो गई है। जून में EV का मार्केट शेयर **12%** रहा। दोपहिया (Two-wheeler) और वाणिज्यिक (Commercial) वाहनों की मजबूत मांग ने इस ग्रोथ को लीड किया है।
EV की धुआंधार बिक्री
भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार ने जून 2026 में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। इस महीने रिटेल बिक्री 3,06,220 यूनिट्स तक पहुंच गई, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 63% की जबरदस्त उछाल है। यह दिखाता है कि भारतीय ग्राहक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। पहली बार, कुल वाहन रिटेल बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 12% से अधिक हो गई है।
दोपहिया और वाणिज्यिक वाहनों का जलवा
इस बिक्री में सबसे बड़ा योगदान इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का रहा, जिनकी 1,93,735 यूनिट्स बिकीं। यह पिछले साल के मुकाबले 75% की वृद्धि दर्शाता है। इस सेगमेंट में TVS Motor, Bajaj Auto और Ather Energy जैसी कंपनियां मार्केट शेयर के लिए जोर-शोर से लगी हैं। दोपहिया वाहनों में EV की पैठ 10.6% तक पहुंच गई है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या यह ऊंची ग्रोथ मार्जिन को सहारा देना जारी रखेगी, क्योंकि इस सेगमेंट में कड़ी प्रतिस्पर्धा अक्सर कीमतों पर दबाव डालती है।
इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहन (Commercial Vehicle) सेगमेंट में भी बिक्री 163.7% बढ़कर 3,214 यूनिट्स हो गई। हालांकि यह संख्या अन्य सेगमेंट की तुलना में कम है, लेकिन तेजी से अपनाए जाने से व्यवसायों के लिए लागत-कुशल लॉजिस्टिक्स पर बढ़ते फोकस का पता चलता है। Tata Motors इलेक्ट्रिक पैसेंजर और वाणिज्यिक दोनों तरह के वाहनों की बिक्री में अपनी प्रमुख स्थिति बनाए हुए है, इसलिए निवेशकों को इसके एग्जीक्यूशन (Execution) और ऑर्डर बुक की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए।
तीन-पहिया वाहनों का दबदबा
इलेक्ट्रीफिकेशन के मामले में इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहनों (Three-wheeler) का दबदबा कायम है, जिनका मार्केट पेनिट्रेशन जून में 64.1% रहा। 77,448 यूनिट्स की बिक्री के साथ, यह सेगमेंट दिखाता है कि भारत में नए तीन-पहिया खरीदारों के लिए इलेक्ट्रिक मॉडल पहले से ही पसंदीदा विकल्प हैं। Mahindra Group और Bajaj Auto इस क्षेत्र में सक्रिय भागीदार बने हुए हैं।
हालांकि, इंडस्ट्री के ये आंकड़े सकारात्मक हैं, लेकिन निवेशकों को व्यापक कारोबारी संदर्भ पर भी विचार करना चाहिए। इन कंपनियों की दीर्घकालिक लाभप्रदता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे नए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी टेक्नोलॉजी के लिए पूंजीगत व्यय (Capital Spending) का प्रबंधन कैसे करती हैं, साथ ही कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने की उनकी क्षमता पर भी। इसके अलावा, जैसे-जैसे अपनाने की दर बढ़ रही है, उद्योग को सरकारी प्रोत्साहनों में संभावित बदलावों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से वाहनों की कीमतों को आम ग्राहकों के लिए किफायती रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विकास की इस गति को आने वाली तिमाहियों में बनाए रखा जा सकता है या नहीं, यह समझने के लिए भविष्य के मासिक रजिस्ट्रेशन डेटा और मांग की स्थिरता पर मैनेजमेंट की टिप्पणियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
