मुख्य वजह: ICE गाड़ियों की धमाकेदार वापसी!
जनवरी 2026 में ऑटोमोबाइल बाजार में एक दिलचस्प तस्वीर दिखी। एक तरफ जहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) की बिक्री में अच्छी ग्रोथ दर्ज की गई, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल-डीजल (ICE) गाड़ियों की बिक्री में इससे कहीं ज़्यादा तेज़ी आई।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) सेगमेंट में, सप्लाई की दिक्कतें कम होने और नए मॉडलों के आने से रजिस्ट्रेशन में करीब 26% महीने-दर-महीने (MoM) की बढ़त देखी गई। लेकिन, ICE टू-व्हीलर की बिक्री में 40% से ज़्यादा की उछाल ने E2W के पेनेट्रेशन को घटाकर 6.6% कर दिया। इस दौरान TVS Motor ने अपनी लीडिंग पोजीशन को 28.3% मार्केट शेयर के साथ मजबूत किया, वहीं Bajaj Auto ने भी अच्छी पकड़ बनाई। दूसरी ओर, Ola Electric का मार्केट शेयर घटकर 6% से थोड़ा ऊपर रह गया।
इसी तरह, इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल (EPV) सेगमेंट में भी रजिस्ट्रेशन पिछले महीने के मुकाबले लगभग 23% बढ़े। मगर, ICE पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 36% की ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई, जिसने EPV पेनेट्रेशन को 3.8% तक नीचे ला दिया। Tata Motors ने करीब 45% शेयर के साथ अपनी लीड बनाए रखी, जबकि MG Motor ने अपनी उपस्थिति को बढ़ाकर लगभग 26% तक पहुंचा दिया। Mahindra & Mahindra का मार्केट शेयर EPV में वॉल्यूम बढ़ने के बावजूद घटा। इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (E3W) सेगमेंट में गिरावट देखी गई, जहां रजिस्ट्रेशन 14% गिरे और पेनेट्रेशन घटकर 59% पर आ गया। इसका मुख्य कारण छोटे प्लेयर्स के वॉल्यूम में कमी रही, हालांकि Bajaj Auto ने सेगमेंट में लीड हासिल की।
मार्केट शेयर में बदलाव और कॉम्पिटिशन का दबाव
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में, कुल बिक्री जनवरी 2026 में लगभग 4,52,589 यूनिट्स तक पहुंची, जो पिछले साल (YoY) के मुकाबले 12.71% ज़्यादा है। Tata Motors ने 70,222 यूनिट्स बेचकर 46.07% YoY ग्रोथ दर्ज की और Maruti Suzuki के बाद दूसरा स्थान हासिल किया। Mahindra & Mahindra 63,510 यूनिट्स के साथ तीसरे स्थान पर रही, जिसमें 25.37% YoY की बढ़त दर्ज की गई।
फाइनेंशियल आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 की शुरुआत में प्रमुख कंपनियों का वैल्यूएशन (valuation) मिला-जुला रहा। Bajaj Auto का पी/ई रेश्यो (P/E Ratio) लगभग 29.8, TVS Motor का 67.85, Mahindra & Mahindra का 31.3 और Tata Motors का 20.6 रहा। इसी तरह, मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) की बात करें तो Bajaj Auto करीब ₹2.66 ट्रिलियन, TVS Motor ₹1.78 ट्रिलियन, Mahindra & Mahindra ₹4.45 ट्रिलियन और Tata Motors ₹1.68 ट्रिलियन पर रहीं।
ऐतिहासिक तौर पर, भारतीय EV मार्केट के पेनेट्रेशन को ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मार्च 2025 के आंकड़े बताते हैं कि सरकारी सब्सिडी में कमी के चलते कुल EV पेनेट्रेशन पिछले साल के 10.3% से घटकर 9.9% हो गया था। यह दिखाता है कि कैसे ICE बिक्री में साइक्लिकल रिकवरी और पॉलिसी सपोर्ट में उतार-चढ़ाव, EV के पेनेट्रेशन को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकते हैं, भले ही वॉल्यूम बढ़ रहा हो।
आगे का रास्ता
BNP Paribas का मानना है कि भले ही नज़दीकी भविष्य में ICE गाड़ियों की मजबूत रिकवरी और लगातार लॉन्च होने वाले नए मॉडलों के कारण EV पेनेट्रेशन पर असर पड़ सकता है, लेकिन लंबी अवधि का आउटलुक (outlook) सकारात्मक बना हुआ है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि जैसे-जैसे इलेक्ट्रिफिकेशन बढ़ेगा, प्रोडक्ट पाइपलाइन (product pipeline) का विस्तार होगा और रीजनल एडॉप्शन पैटर्न (regional adoption patterns) अलग-अलग होंगे, वैसे-वैसे ओईएम (OEMs) के बीच वैल्यू का पुनर्वितरण होगा।
इसके अलावा, सीएनजी (CNG) गाड़ियों में 47% महीने-दर-महीने (MoM) की भारी उछाल, भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार की विविधता और विकास को दर्शाती है। यहां EVs को न केवल ICE बल्कि अन्य फ्यूल-एफिशिएंट टेक्नोलॉजीज से भी मुकाबला करना होगा। 2026 के लिए इंडस्ट्री में 6-8% की वॉल्यूम ग्रोथ का अनुमान लगाया जा रहा है, जिसमें जीएसटी (GST) रैशनलाइजेशन और आसान मॉनेटरी कंडीशन जैसी पॉलिसी सपोर्ट अहम भूमिका निभाएंगी। हालांकि, एसयूवी (SUVs) खरीदारों की पहली पसंद बनी हुई हैं।