India EV Market: 2032 तक 3 करोड़ यूनिट पार! बैटरी इंडस्ट्री में बंपर कमाई का मौका

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AuthorAditya Rao|Published at:
India EV Market: 2032 तक 3 करोड़ यूनिट पार! बैटरी इंडस्ट्री में बंपर कमाई का मौका

भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट 2032 तक 12 गुना बढ़कर 3 करोड़ यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है। 2025 तक सालाना बिक्री 2.6 मिलियन यूनिट तक जा सकती है। इस बड़े बदलाव से बैटरी और कंपोनेंट्स की डिमांड में जबरदस्त उछाल आने की उम्मीद है, जिससे यह इंडस्ट्री ₹3.02 लाख करोड़ की हो जाएगी। खास बात यह है कि अभी 2-व्हीलर और 3-व्हीलर की बिक्री सबसे ज्यादा है, लेकिन 4-व्हीलर सेगमेंट भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

EV सेक्टर में बड़ा ग्रोथ

भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर अब शुरुआती दौर से निकलकर तेजी से आगे बढ़ने की राह पर है। सरकारी अनुमानों के मुताबिक, 2032 तक सड़कों पर कुल 3.04 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहन हो सकते हैं। EV की मार्केट में हिस्सेदारी 2025 तक बढ़कर 9.5% तक पहुँचने की उम्मीद है, जो 2024 में 8.1% थी।

कौन से सेगमेंट सबसे आगे?

इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर अभी भी इस बदलाव के सबसे बड़े वाहक हैं, जो कुल EV बिक्री का 60% से ज्यादा हिस्सा रखते हैं। इसके बाद इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर का नंबर आता है, जो बाजार का लगभग 32% हिस्सा हैं। ये हल्के वाहन फिलहाल EV मार्केट पर हावी हैं। हालांकि, पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में भी इलेक्ट्रिक 4-व्हीलर की हिस्सेदारी बढ़कर 7.7% हो गई है। इलेक्ट्रिक बसें और भारी ट्रक अभी भले ही कम बिक रहे हों, लेकिन सरकारी पहलों और क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ते फ्लीट ऑपरेशन्स के कारण इनमें भी तेजी की उम्मीद है।

बैटरी और कंपोनेंट्स का बढ़ता बाजार

EV की बढ़ती मांग से पावर स्टोरेज और व्हीकल कंपोनेंट्स के लिए एक बड़ा सेकेंडरी मार्केट तैयार हो रहा है। बैटरी की कुल मांग 2025 में 19 गीगावाट-घंटे (GWh) से बढ़कर 2032 तक 362 GWh तक पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धि सिर्फ वॉल्यूम के कारण नहीं, बल्कि 4-व्हीलर और कमर्शियल वाहनों में बड़ी बैटरी पैक के इस्तेमाल से भी प्रभावित होगी।

मोटर, इन्वर्टर और बैटरी पैक जैसे कंपोनेंट्स का बाजार 2032 तक ₹3.02 लाख करोड़ का हो सकता है। इसमें अकेले बैटरी पैक का हिस्सा आधे से ज्यादा है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण है कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग यानी लोकलाइजेशन कितनी तेजी से बढ़ रहा है। बैटरी असेंबली बढ़ रही है, लेकिन एडवांस्ड पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए भारत अभी भी आयात पर बहुत निर्भर है। मोटर और कंट्रोलर जैसे जरूरी कंपोनेंट्स में लोकलाइजेशन का स्तर 30% से 40% के बीच है। ऐसे में, जो कंपनियां इन कंपोनेंट्स के स्वदेशी उत्पादन में सफल होंगी, वे बाजार परिपक्व होने पर ज्यादा वैल्यू कैप्चर कर पाएंगी।

जोखिम और भविष्य का अनुमान

अच्छी मांग के बावजूद, इंडस्ट्री को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भविष्य की ग्रोथ सरकारी सब्सिडी की स्थिरता, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से विस्तार और घरेलू निर्माताओं की लागत कम करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। बैटरी सेल के लिए आयातित कच्चे माल पर निर्भरता एक कमजोरी बनी हुई है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में मुश्किल आने पर मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। निवेशकों को न केवल वाहनों की बिक्री में टॉप-लाइन ग्रोथ पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि इंपोर्ट से जुड़ी प्राइसिंग प्रेशर से बचने के लिए कंपनियों के गहरे स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में प्रगति पर भी नजर रखनी चाहिए।

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