आर्थिक फायदे बने EV की पहचान
FY26 में भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट ने ज़बरदस्त रफ़्तार पकड़ी है। ग्राहक अब पर्यावरण को लेकर चिंतित होने से ज़्यादा, EV के आर्थिक फायदों पर ध्यान दे रहे हैं। 'टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप' (TCO) और सीधे कमाई की संभावना, ये दो फैक्टर ग्राहकों के फैसलों को सबसे ज़्यादा प्रभावित कर रहे हैं।
हालांकि, शुरुआत में EV की कीमत पेट्रोल/डीज़ल वाली गाड़ियों से 20-30% ज़्यादा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में कम रनिंग और मेंटेनेंस कॉस्ट के चलते TCO का अंतर तेज़ी से कम हो रहा है। खास तौर पर दो-पहिया और तीन-पहिया वाहनों के लिए, कम ऑपरेटिंग कॉस्ट सीधे तौर पर ड्राइवरों की कमाई बढ़ाती है। State Policies, जैसे टैक्स में छूट और खरीद पर सब्सिडी, इस ट्रेंड को और मज़बूत कर रही हैं। इस व्यावहारिक बदलाव ने EV को सिर्फ पर्यावरण-अनुकूल विकल्प से एक 'कमाई का ज़रिया' बना दिया है। उदाहरण के लिए, Mahindra & Mahindra ने FY26 में ₹15,089 करोड़ का EV रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल से 344% ज़्यादा है।
राज्यों में अलग-अलग तस्वीर
EV मार्केट की ग्रोथ हर राज्य में एक जैसी नहीं है। उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक तीन-पहिया (e-3Ws) की कम ऑपरेटिंग कॉस्ट के कारण बिक्री सबसे ज़्यादा है, जिससे ड्राइवरों की आय बढ़ती है। महाराष्ट्र में इंसेंटिव और इंफ्रास्ट्रक्चर के सहारे कई सेगमेंट्स में संतुलित ग्रोथ दिख रही है। वहीं, कर्नाटक ने पहले टैक्स में छूट दी, लेकिन अब वह वाहन की कीमत पर 5-10% लाइफटाइम टैक्स लगा रहा है, जिसका लक्ष्य सालाना ₹250 करोड़ जुटाना है, हालांकि इससे EV की बिक्री धीमी हो सकती है। दिल्ली में ₹30 लाख तक की EV पर रोड टैक्स में छूट जारी है, जिससे यहां अच्छी पैठ बनी हुई है।
चुनौतियां अभी भी बरकरार
ज़बरदस्त ग्रोथ के बावजूद, EV अपनाने में कई चुनौतियां हैं। ज़्यादा शुरुआती कीमत (Upfront Cost) अभी भी एक बड़ा रोड़ा है, खासकर प्राइस-सेंसिटिव पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ रहा है, पर इसके असमान वितरण से 'रेंज एंग्जायटी' (Range Anxiety) बनी रहती है। बैटरी कंपोनेंट्स जैसे लिथियम और कोबाल्ट की सप्लाई चेन में अस्थिरता भी एक मुद्दा है। कमर्शियल यूज़र्स के लिए, EV लोन पर हाई इंटरेस्ट रेट ( 15-33% ) TCO के फायदे को कम कर सकता है। कर्नाटक का टैक्स के प्रति बदला रवैया राज्य के रेवेन्यू लक्ष्यों और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के बीच टकराव को दर्शाता है, जो इंडस्ट्री की ग्रोथ को धीमा कर सकता है। Tata Motors ने FY26 में 78,811 यूनिट्स और Mahindra ने 42,721 यूनिट्स बेची हैं, लेकिन JSW MG Motor India जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। बैटरी की लाइफ, बदलने की लागत और रीसेल वैल्यू जैसी चिंताएं भी ग्राहकों के भरोसे को प्रभावित करती हैं।
भारत के EV मार्केट का भविष्य
विश्लेषकों का भारत के EV सेक्टर के लिए भविष्य आशावादी है। अनुमान है कि 2035 तक मार्केट USD 1,283.08 बिलियन तक पहुंच जाएगा, जो 50% से ज़्यादा की CAGR से बढ़ेगा। सरकारी नीतियों का समर्थन और ग्राहकों में जागरूकता बढ़ने से ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, EV की ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी, बैटरी की कीमतों में कमी की रफ़्तार और लगातार इनोवेशन पर ध्यान देने की ज़रूरत होगी।
