भारत के EV सेक्टर में कॉम्पिटिशन का बदलता मंजर
भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। हर महीने 26,319 यूनिट्स की बिक्री के साथ यह सेक्टर लगातार 17 महीनों से ग्रोथ दिखा रहा है। अब यह सिर्फ Tata Motors और Mahindra & Mahindra के दबदबे की कहानी नहीं रह गई है। बल्कि, यह एक ऐसा फेज है जहां नई कंपनियां आक्रामक तरीके से अपनी जगह बना रही हैं और पुरानी कंपनियों को कड़ी टक्कर दे रही हैं।
Tata-Mahindra पर बढ़ा दबाव
Tata Motors और Mahindra & Mahindra अभी भी इस सेक्टर के बड़े खिलाड़ी हैं, जो मिलकर करीब 62% मार्केट पर राज करते हैं। Tata Motors अपने Punch, Nexon और Tiago EV जैसे मॉडल्स की रेंज के दम पर आगे बढ़ रही है, वहीं Mahindra प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। लेकिन, अब नई कंपनियों के लिए मार्केट में आना आसान हो गया है, जिससे इनका मार्केट शेयर दबाव में है।
नई कंपनियों की एंट्री और स्ट्रैटेजी
वियतनाम की VinFast मार्केट को जिस तरह से बदल रही है, वह देखने लायक है। यह कंपनी सीधे रिटेल बिक्री के बजाय 'Green SM' नाम से इलेक्ट्रिक टैक्सी सर्विस शुरू करके दिल्ली-NCR में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। VinFast, HPCL के साथ मिलकर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है और ग्राहकों को अलग-अलग तरह के फायदे दे रही है। यह पारंपरिक बिक्री मॉडल से बिल्कुल अलग है। वहीं, JSW MG Motor जैसी कंपनियां भी अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं, लेकिन अब उन्हें उभरती हुई, फ्लीट-बेस्ड कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
लंबी अवधि में EV सेगमेंट की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) को लेकर निवेशकों को सावधान रहना चाहिए। इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ऊंची कीमत और डिस्काउंट की वजह से कंपनियों का मार्जिन कम हो सकता है। इसके अलावा, बैटरी सप्लाई चेन पर निर्भरता भी कीमतों में उतार-चढ़ाव का खतरा बढ़ाती है। कई कंपनियों पर कर्ज का बोझ भी ज्यादा है, जो इस हाई-इंटरेस्ट रेट के माहौल में चिंता का विषय है। जैसे-जैसे कॉम्पिटिशन बढ़ेगा, प्राइस वॉर (Price War) का खतरा भी बढ़ेगा, जिससे कंपनियों को मुनाफा गंवाकर भी मार्केट शेयर बनाए रखना पड़ सकता है।
आगे का रास्ता
सभी कंपनियां 2027 तक कई नए मॉडल्स लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं। सरकार 2030 तक 50% EV पैठ का लक्ष्य लेकर चल रही है। ऐसे में, जो कंपनियां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेयर पार्ट्स और बैटरी मैनेजमेंट जैसी पूरी ओनरशिप ईकोसिस्टम बनाने में कामयाब होंगी, वही आगे बढ़ पाएंगी।
