प्राइवेट इक्विटी ने भरी उड़ान, M&A पर लगा ब्रेक
साल 2026 की पहली तिमाही में भारत के ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में डील को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। एक तरफ जहां प्राइवेट इक्विटी (PE) फर्मों ने भविष्य की मोबिलिटी में भारी निवेश किया है, वहीं दूसरी तरफ स्ट्रैटेजिक M&A (मर्जर और अधिग्रहण) की एक्टिविटी में भारी गिरावट देखी गई है। यह दिखाता है कि निवेशक भविष्य के EV और मोबिलिटी-एज-ए-सर्विस (MaaS) पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।
PE का जलवा, वैल्यू में 86% का उछाल
इस तिमाही में कुल 35 डील्स हुईं, जिनकी वैल्यू $745 मिलियन रही। यह पिछले तिमाही के मुकाबले वैल्यू में कमी दर्शाता है, लेकिन इस स्थिरता की वजह PE का बड़ा निवेश रहा। PE फर्मों ने 28 डील्स में $702 मिलियन का निवेश किया, जो पिछले तिमाही की तुलना में वॉल्यूम में 12% की बढ़ोतरी और वैल्यू में 86% का बड़ा उछाल है।
PE का फोकस खास तौर पर EV और MaaS कंपनियों पर रहा। EV सेक्टर में 11 डील्स हुईं, जिनकी वैल्यू करीब $448 मिलियन थी। वहीं, MaaS प्लेटफॉर्म्स को 9 डील्स के जरिए लगभग $210 मिलियन का फंड मिला।
कुछ प्रमुख डील्स में PMI Electro Mobility Solutions को ₹250 करोड़ (लगभग $29.5 मिलियन) का फंड मिला, ग्रीनसेल मोबिलिटी ने $89 मिलियन जुटाए और Drivn Transition को $80 मिलियन की फंडिंग हासिल हुई।
M&A एक्टिविटी में 91% की गिरावट
इसके विपरीत, स्ट्रैटेजिक M&A की एक्टिविटी में बड़ी गिरावट आई। इस सेक्टर में केवल 7 M&A डील्स हुईं, जिनकी कुल वैल्यू महज $43 मिलियन रही। यह पिछले तिमाही की तुलना में वॉल्यूम में 22% की कमी और वैल्यू में 91% की भारी गिरावट है।
इस गिरावट का मुख्य कारण बड़ी क्रॉस-बॉर्डर या स्ट्रैटेजिक डील्स का न होना रहा। Cars24 Services ने Vehicleinfo और Carinfo जैसी छोटी कंपनियों को एक्वायर किया, जो बड़े कंसॉलिडेशन (बाजार का एकीकरण) की ओर इशारा नहीं करती।
भविष्य की राह
यह स्थिति दर्शाती है कि स्थापित ऑटो कंपनियां EV ट्रांजिशन की रफ्तार, वैल्यूएशन के अंतर या बाजार की अनिश्चितता के कारण विलय से कतरा रही हैं। जबकि PE फर्म ग्रोथ वाले EV सेगमेंट में पैसा लगा रही हैं, ग्लोबल EV मार्केट की ग्रोथ उम्मीदों से थोड़ी धीमी हो सकती है। भविष्य की तिमाही में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह डायवर्जेंस (अंतर) अच्छी तरह से पोजीशन वाली PE-बैक्ड फर्मों के लिए कंसॉलिडेशन के अवसर पैदा करेगा या M&A में हिचकिचाहट बनी रहेगी।