अगस्त 2026 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन में महीने-दर-महीने **13%** की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे कुल बिक्री लगभग **1.82 लाख** यूनिट्स पर रही। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट सिर्फ मौसमी है, क्योंकि साल-दर-साल आधार पर यह सेक्टर अब भी **60%** की शानदार ग्रोथ दिखा रहा है।
बाजार में आई मामूली सुस्ती
अगस्त के आंकड़ों में आई गिरावट के पीछे मुख्य वजहें मौसमी हैं। ओणम और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के बीच हुई भारी बारिश ने शोरूम्स पर ग्राहकों की आवाजाही को प्रभावित किया है। हालांकि, 60% से 65% की साल-दर-साल ग्रोथ यह साबित करती है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की डिमांड में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है, यह केवल एक टेम्परेरी एडजेस्टमेंट है।
बड़े खिलाड़ियों का दबदबा
मार्केट शेयर की बात करें, तो TVS Motor और Bajaj Auto इस दौड़ में सबसे आगे हैं। इन दोनों कंपनियों का संयुक्त रूप से मार्केट पर 50% से ज्यादा का कब्जा है। अपनी मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन और शानदार पोर्टफोलियो के दम पर ये दिग्गज कंपनियां मंथली उतार-चढ़ाव के बावजूद खुद को मजबूती से बचाए हुए हैं। वहीं, छोटे प्लेयर्स के लिए इस कॉम्पिटिटिव मार्केट में सर्विस और ब्रांडिंग की चुनौती बनी हुई है।
सरकार की सब्सिडी से मिलेगा सहारा
इन्वेस्टर्स के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने PM E-Drive सब्सिडी को 2028 तक के लिए बढ़ा दिया है। इस नीतिगत स्थिरता से कंपनियों को लॉन्ग-टर्म प्लानिंग में मदद मिलेगी और डिमांड का आधार मजबूत बना रहेगा।
आगे का रास्ता
कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है—मार्जिन्स को बचाते हुए सेल्स ग्रोथ को बनाए रखना। फेस्टिव सीजन के चलते सितंबर और अक्टूबर में थोड़ी वॉल्यूम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि ग्राहक भारी डिस्काउंट और नए मॉडल्स का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां अपने प्रॉफिट मार्जिन से समझौता किए बिना सेल्स को कैसे रीबाउंड करती हैं।
