सितंबर 2026 में प्रस्तावित इंडिया-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत लक्जरी गाड़ियों और मोटरसाइकिलों पर इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने की तैयारी है। इस समझौते से Tata Motors, Bajaj Auto और JSW Group जैसी कंपनियों के लिए सप्लाई चेन और स्ट्रैटेजी बदलने का मौका बनेगा।
यूरोपीय आयोग ने सितंबर 2026 में इंडिया-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का प्रस्ताव यूरोपीय परिषद को सौंप दिया है। उम्मीद है कि साल के अंत तक हस्ताक्षर होने के बाद यह समझौता 2027 से लागू हो जाएगा। इस समझौते का सबसे बड़ा बदलाव ऑटो सेक्टर में दिखेगा, जहां दोनों क्षेत्रों के बीच 96% व्यापारिक वस्तुओं पर टैरिफ धीरे-धीरे कम किया जाएगा।
ऑटो सेक्टर के लिए 'डुल-ट्रैक' पॉलिसी
समझौते के तहत, €35,000 से ज्यादा कीमत वाली यूरोपीय लक्जरी कारों पर ड्यूटी पहले साल में 30% तक घटेगी और 5वें साल तक यह 10% के स्तर पर आ जाएगी। हालांकि, राहत की बात यह है कि €15,000 से कम कीमत वाली मास-मार्केट गाड़ियों को इस कटौती से बाहर रखा गया है, जिससे घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को सुरक्षा मिलेगी।
प्रमुख कंपनियों की रणनीति
- Tata Motors: अपनी डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो के साथ, कंपनी कमर्शियल व्हीकल स्पेस में तालमेल बिठाकर इस बदलते टैरिफ स्ट्रक्चर का फायदा उठाने की कोशिश करेगी।
- Bajaj Auto: ऑस्ट्रियाई ब्रांड KTM के साथ लंबे समय से जुड़ी बजाज को अपनी ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने में मदद मिलेगी। कंपनी अब स्थानीय उत्पादन और इम्पोर्ट के बीच लागत को देखते हुए बेहतर फैसला ले सकेगी।
- JSW Group: Skoda Volkswagen India के साथ पार्टनरशिप के जरिए, JSW अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) ऑपरेशंस को अगले 5 वर्षों में स्केल करने की तैयारी कर रही है ताकि यूरोपियन इम्पोर्ट्स के दबाव से पहले मजबूत नींव तैयार हो सके।
जोखिम और चुनौतियां
यह समझौता नए अवसर तो लाता है, लेकिन घरेलू मैन्युफैक्चरर्स के लिए मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। यदि कंपनियां यूरोपीय मॉडल्स की कीमत और फीचर्स का मुकाबला नहीं कर पाईं, तो उनका प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित हो सकता है। साथ ही, अभी इस डील का यूरोपीय संसद और भारतीय प्रक्रियाओं द्वारा पुष्टि (Ratification) होना बाकी है, जिससे रेगुलेटरी अनिश्चितता बनी रह सकती है। निवेशकों को अब इस एग्रीमेंट के फाइनल साइनिंग और ड्यूटी रिडक्शन की गाइडलाइन्स पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
