E2W सेक्टर में बहार! पुरानी कंपनियों का दबदबा, नए फिस्कल में **16-18%** ग्रोथ का अनुमान

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
E2W सेक्टर में बहार! पुरानी कंपनियों का दबदबा, नए फिस्कल में **16-18%** ग्रोथ का अनुमान
Overview

भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) सेक्टर अगले फाइनेंशियल ईयर में **16-18%** की शानदार ग्रोथ के लिए तैयार है। यह रफ्तार पिछले साल के **12-13%** की तुलना में काफी बेहतर है। इस उछाल की मुख्य वजह दुर्लभ-पृथ्वी मैग्नेट (rare-earth magnet) की सप्लाई का स्थिर होना और इलेक्ट्रिक गाड़ियों का पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले लगातार सस्ता रहना है। खास बात यह है कि पुरानी और स्थापित कंपनियों ने बाजार में अपनी हिस्सेदारी **62%** तक बढ़ा ली है, जो कि एक साल पहले **47%** थी, और नए प्लेयर्स पीछे छूट रहे हैं।

सप्लाई चेन की मजबूती और लागत का फायदा

भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) मार्केट में इस उम्मीद से भरी तेजी की सबसे बड़ी वजह चीन से दुर्लभ-पृथ्वी मैग्नेट (rare-earth magnet) की सप्लाई का सुधरना है। इससे प्रोडक्शन में आ रही रुकावटें दूर हो गई हैं, जो इस साल की ग्रोथ को धीमा कर रही थीं। वहीं, E2W चलाने का खर्च पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले काफी कम है। E2W पर जहां प्रति किलोमीटर सिर्फ ₹0.3 का खर्च आता है, वहीं पेट्रोल गाड़ियों पर यह ₹2.0-2.5 तक पहुंच जाता है। इसी बड़े लागत अंतर की वजह से लोग E2W की ओर आकर्षित हो रहे हैं, भले ही सरकारी सब्सिडी कम हो रही है। इसी मजबूत कॉस्ट एडवांटेज पर सेक्टर की हाई-टीन ग्रोथ टिकी हुई है।

पुरानी कंपनियों का दबदबा बढ़ा

भारतीय E2W मार्केट में सबसे बड़ा ट्रेंड पुरानी और जानी-मानी कंपनियों (legacy players) द्वारा बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत करना है। जनवरी 2026 तक, इन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 62% हो गई है, जो कि एक साल पहले सिर्फ 47% थी। यह वृद्धि सिर्फ बाजार के विस्तार के कारण नहीं है, बल्कि इन कंपनियों के पास मौजूद मजबूत डीलर नेटवर्क, बेहतर सप्लायर इकोसिस्टम और एंट्री-लेवल व मिड-प्राइस सेगमेंट में ज्यादा मॉडल्स लॉन्च करने की क्षमता का नतीजा है। इन फायदों के चलते ये कंपनियां तेजी से नए प्रोडक्ट्स लॉन्च कर पाती हैं और उनकी सप्लाई भी लगातार बनी रहती है।

वहीं, Ather Energy जैसी कुछ नई कंपनियां अच्छी रेवेन्यू ग्रोथ और कम हो रहे घाटे के बावजूद, प्रति यूनिट वाहन की इकोनॉमिक्स में अभी भी संघर्ष कर रही हैं। दूसरी ओर, TVS Motor Company जैसी दिग्गज कंपनियां, जिनका मार्केट कैप करीब ₹1.77 लाख करोड़ और P/E रेश्यो 60.5x के आसपास है, और Bajaj Auto, जिनका P/E 25-30x के बीच चल रहा है, E2W को अपने बड़े पोर्टफोलियो का हिस्सा मानकर चल रही हैं। E2W उनके कुल वॉल्यूम का सिर्फ 5-6% होता है, जिससे कंपनी की कमाई में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं आता। पब्लिकली लिस्टेड Ather Energy का मार्केट कैप लगभग ₹26,718 करोड़ है, जबकि प्राइवेट कंपनी Ola Electric का वैल्यूएशन अगस्त 2024 में $5.7 बिलियन था। हालांकि, हाल की रिपोर्टों के अनुसार, Ola Electric की बाजार हिस्सेदारी पिछले साल 24% से घटकर जनवरी 2026 में 6% से भी कम रह गई है।

मार्केट शेयर में बड़े बदलाव

जनवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, TVS Motor 29% मार्केट शेयर के साथ सबसे आगे है, इसके बाद Bajaj Auto 21% और Ather Energy 18% पर है। Hero MotoCorp की हिस्सेदारी करीब 10% है, जबकि Ola Electric का शेयर 6.1% पर आ गया है, जो पहले काफी बड़ा था। यह दिखाता है कि मार्केट अब सिर्फ नए ग्राहकों की ओर नहीं, बल्कि भरोसेमंद प्रोडक्ट्स और बिक्री के बाद की सर्विस (after-sales service) पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, जहाँ पुरानी कंपनियां हमेशा से आगे रही हैं।

सेक्टर का भविष्य और सरकारी मदद

आने वाले फिस्कल ईयर में E2W की कुल टू-व्हीलर वॉल्यूम में हिस्सेदारी 7% तक पहुंचने का अनुमान है, जो मौजूदा 5.5% से काफी ज्यादा है। इस ग्रोथ को चलाने में लागत का फायदा और बेहतर सप्लाई चेन अहम भूमिका निभा रहे हैं। FAME-II जैसी सब्सिडी योजनाओं का विस्तार और डोमेस्टिक बैटरी मैन्युफैक्चरिंग व चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मिलने वाले संभावित इंसेंटिव्स E2W को और बढ़ावा देंगे। साल 2026 के बजट में सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर में लॉन्ग-टर्म निवेश पर जोर दिया गया है, न कि सिर्फ शॉर्ट-टर्म सब्सिडी पर। भले ही इकोनॉमी में 6% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान हो, E2W सेगमेंट का जन्मजात आर्थिक फायदा और सरकारी नीतियां इसे आगे बढ़ने में मदद करेंगी। ई-स्कूटर इस वॉल्यूम का 90-95% हिस्सा बनाएंगे।

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