सरकार ने इलेक्ट्रिक बस और ट्रक बनाने वाली कंपनियों को राहत देते हुए ट्रैक्शन मोटर मैग्नेट और शाफ्ट के लोकलाइजेशन की डेडलाइन को 1 अप्रैल, 2027 तक बढ़ा दिया है। इस फैसले से कंपनियों को PM E-DRIVE सब्सिडी का लाभ मिलना जारी रहेगा, हालांकि आयात पर निर्भरता अभी भी एक बड़ा रिस्क बनी हुई है।
सब्सिडी और फाइनेंशियल इम्पैक्ट
भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) ने EV इंडस्ट्री की मुश्किलों को समझते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। PM E-DRIVE स्कीम के तहत इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट और शाफ्ट के लोकल मैन्युफैक्चरिंग नियम को अब 1 अप्रैल, 2027 तक टाल दिया गया है।
निवेशकों के लिए इस बदलाव का सबसे बड़ा मतलब 'सब्सिडी बरकरार रहना' है। असल में, सरकार की सब्सिडी पूरी तरह से डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन से जुड़ी है। अगर पुरानी डेडलाइन (सितंबर 2026) कायम रहती, तो कंपनियाँ या तो सब्सिडी खो देतीं या फिर उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ता। अब कंपनियों को मैन्युफैक्चरिंग सेटअप तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है, जिससे उनके मार्जिन पर फिलहाल कोई दबाव नहीं आएगा।
अभी भी बना हुआ है रिस्क
हालांकि यह राहत की खबर है, लेकिन भारत की चीन से आने वाली NdFeB मैग्नेट्स (Neodymium Iron Boron) पर भारी निर्भरता एक स्ट्रक्चरल रिस्क है। देश में अभी भी इन हाई-परफॉर्मेंस मैग्नेट्स को बनाने के लिए जरूरी इकोसिस्टम शुरुआती दौर में है। भविष्य में अगर कोई जियो-पॉलिटिकल तनाव या ट्रेड रिस्ट्रिक्शन आता है, तो प्रोडक्शन पर असर पड़ सकता है।
ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) के लिए अब चुनौती यह है कि वे इन 2 सालों में कैसे अपनी लोकल सप्लाई चेन तैयार करते हैं। मार्केट की नजरें अब इस बात पर होंगी कि क्या कंपनियाँ बिना क्वालिटी से समझौता किए या लागत बढ़ाए इन पुर्जों का निर्माण देश के भीतर कर पाती हैं।
