सब्सिडी घटी, परफॉर्मेंस के स्टैंडर्ड्स बढ़े!
भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) सेक्टर के लिए अपनी सब्सिडी पॉलिसी में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। PM E-DRIVE स्कीम के तहत E2W पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी को 31 जुलाई, 2026 तक बढ़ाया गया है, लेकिन इस विस्तार के साथ ही सब्सिडी की राशि को आधा कर दिया गया है। पहले जहां प्रति किलोवॉट-घंटे (kWh) ₹10,000 की सब्सिडी मिलती थी, वहीं अब यह घटकर ₹5,000 प्रति kWh कर दी गई है। यह सब्सिडी वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15% तक सीमित रहेगी।
नए नियम और इनका असर
इस नीतिगत बदलाव के साथ, 13 जनवरी, 2026 से इलेक्ट्रिक वाहनों को सब्सिडी के लिए कुछ न्यूनतम परफॉर्मेंस स्टैंडर्ड्स, जैसे कि बैटरी रेंज, टॉप स्पीड और बैटरी टेक्नोलॉजी, को पूरा करना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि यह कदम इंडस्ट्री को भारी-भरकम सरकारी सहायता पर निर्भर रहने के बजाय प्रोडक्ट इनोवेशन (Product Innovation) और बेहतर परफॉर्मेंस पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करेगा।
खरीदारों पर लागत का प्रभाव
सब्सिडी में कटौती का सीधा असर ई-वाहनों की अंतिम कीमत पर पड़ेगा, जिससे वे खरीदारों के लिए कम किफायती हो सकते हैं। गौरतलब है कि भारतीय E2W मार्केट ने 2025 में रिकॉर्ड 1.28 मिलियन यूनिट्स की बिक्री दर्ज की थी, और 2026 में यह संख्या बढ़कर 1.35 मिलियन यूनिट्स तक पहुंच गई। TVS Motor जैसी प्रमुख कंपनियों ने FY26 में 300,000 से अधिक E2W बेचे, वहीं Bajaj Auto ने 276,000 यूनिट्स और Ather Energy ने लगभग 230,000 यूनिट्स की बिक्री की।
E3W सेगमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां
इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (E3W) सेगमेंट में, जहाँ L5 कैटेगरी के वाहनों के लिए सब्सिडी पहले ही खत्म हो चुकी है, 2025 में लगभग 797,729 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो कुल थ्री-व्हीलर बिक्री का 60% रहा। PM E-DRIVE स्कीम ने जनवरी 2026 तक लगभग 293,000 E3Ws का समर्थन किया है। हालांकि, इस सेक्टर की ग्रोथ के लिए पब्लिक चार्जिंग स्टेशंस (Public Charging Stations) की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। स्टेशनों की असमान उपलब्धता ई-वाहनों के व्यापक उपयोग को बाधित कर सकती है।
भविष्य की राह: कम सब्सिडी, अधिक प्रतिस्पर्धा
सब्सिडी में धीरे-धीरे कमी आना उन कंपनियों के लिए एक चुनौती पेश कर सकता है जो सरकारी फंड पर काफी निर्भर रही हैं। जिन कंपनियों के पास कमजोर वित्तीय स्थिति है, उन्हें कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिससे मांग प्रभावित हो सकती है। सरकार अब स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग (Local Manufacturing) और गुणवत्ता को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि तकनीकी सुधारों और पेट्रोल कारों के साथ लागत के अंतर के कम होने से बाजार में लगातार विस्तार की उम्मीद है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Charging Infrastructure) में निरंतर निवेश और स्पष्ट सरकारी नीति दीर्घकालिक सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगी।