कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने ऑटो कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर कंपनियों को बड़ी राहत देने का वादा किया है। अगले दो महीनों में इंपोर्ट से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने के लिए नए रेगुलेशन आएंगे, हालांकि चीन पर निर्भरता अभी भी निवेशकों के लिए एक बड़ा मॉनिटरेबल फैक्टर है।
भारत सरकार ने चीन के साथ व्यापार को लेकर एक अधिक व्यावहारिक (Pragmatic) रुख अपनाने का संकेत दिया है। 24 अगस्त 2026 को कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने घोषणा की है कि अगले दो महीनों के भीतर नए रेगुलेशन पेश किए जाएंगे। इन बदलावों का उद्देश्य ऑटो कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर सेक्टर की उन कंपनियों की चिंताओं को दूर करना है, जो लंबे समय से सप्लाई चेन में बाधाओं और टेक्निकल स्टाफ के वीजा मुद्दों से जूझ रही हैं।
यह कदम अगस्त की शुरुआत में हुई बॉर्डर-अफेयर्स की 36वीं दौर की बातचीत के बाद आए एक 'सप्लाई-चेन ट्रूस' के बीच उठाया गया है। हालांकि उद्योग जगत में इसे लेकर काफी उत्साह है, लेकिन निवेशकों को यह समझना होगा कि यह इंपोर्ट प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने का फैसला नहीं है। सरकार अभी भी सख्त क्वालिटी कंट्रोल और लाइसेंसिंग मैंडेट को बनाए रखेगी और कंपनियों को Bureau of Indian Standards (BIS) सर्टिफिकेशन का पालन करना अनिवार्य होगा।
ऑटो सप्लाई चेन पर असर
भारतीय ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए चीन से इंपोर्ट एक महत्वपूर्ण फैक्टर बना हुआ है। FY26 में भारत के कुल ऑटो कंपोनेंट इंपोर्ट में चीन की हिस्सेदारी 36% रही, जो पिछले साल के 29% के मुकाबले काफी ज्यादा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के लिए जरूरी एडवांस टेक्नोलॉजी जैसे लिथियम-आयन बैटरी सेल्स, इलेक्ट्रिक पावरट्रेन और रेयर-अर्थ मैग्नेट्स के लिए भारत की निर्भरता चीन पर बहुत अधिक है।
प्रमुख ऑटोमेकर्स के लिए स्थिति दोहरी चुनौती जैसी है। एक तरफ सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है, तो दूसरी तरफ हाई-टेक पार्ट्स के लिए चीन के सप्लायर्स पर निर्भरता मजबूरी है। नए रेगुलेशन से कंपनियों को ये पार्ट्स आसानी से मिल सकेंगे, जिससे व्हीकल लॉन्च में होने वाली देरी कम हो सकती है।
स्ट्रैटेजिक रिस्क को समझना
निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि कूटनीतिक सुधार अभी भी नाजुक स्थिति में है। अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर तनाव की हालिया खबरों से पता चलता है कि भू-राजनीतिक जोखिम अभी खत्म नहीं हुए हैं, जो अचानक व्यापार नीति को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, सितंबर 2026 में होने वाले BRICS समिट पर भी सबकी नजरें हैं, जहां इन्वेस्टमेंट पैकेज पर चर्चा हो सकती है। शेयरधारकों के लिए अब सरकार की ओर से आने वाले नए नियमों का आधिकारिक नोटिफिकेशन देखना सबसे जरूरी होगा।
