सरकारी नियमों के तहत, भारत की नौ प्रमुख कार निर्माता कंपनियों पर कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE-2) मानकों का पालन न करने पर लगने वाले जुर्माने में भारी कमी आई है। वित्तीय वर्ष 2023 से 2025 तक की अवधि के लिए कुल पेनल्टी का अनुमानित आंकड़ा ₹7,800 करोड़ से घटाकर ₹2,728 करोड़ कर दिया गया है। यह जबरदस्त कटौती एक नई गणना पद्धति के कारण संभव हुई है, जिसके तहत अब FY23 के अप्रैल-दिसंबर की अवधि के लिए सभी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) के लिए ₹37.5 लाख की एक तय पेनल्टी लगाई जाएगी। यह पुरानी गणनाओं से एक बड़ा बदलाव है, जिसमें गैर-अनुपालन की सीमा के आधार पर प्रति-कार शुल्क लगाया जाता था।
इसके अलावा, ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of Power) प्रत्येक OEM के लिए एक क्रेडिट-डेबिट रजिस्ट्री (Credit-Debit Registry) स्थापित कर रहा है। यह रजिस्ट्री नियमों के अनुपालन (compliance) और गैर-अनुपालन को अधिक प्रभावी ढंग से ट्रैक करेगी। निर्माताओं को अब अनुपालन ब्लॉक अवधि (compliance block period) के भीतर उत्पन्न अतिरिक्त क्रेडिट के साथ अधिक लचीलापन मिलेगा। इन अतिरिक्त क्रेडिट को पूल (pool) किया जा सकता है। वहीं, घाटे (deficit) का सामना करने वाले OEMs सरप्लस क्रेडिट रखने वाले निर्माताओं से आवश्यक क्रेडिट खरीद सकते हैं। इससे यदि वे फिर भी घाटे में रहते हैं, तो उन पर भारी जुर्माने का जोखिम काफी कम हो जाएगा।
CAFE-2 नॉर्म्स फिलहाल FY23 से FY27 तक लागू हैं, और इसके बाद अगला चरण, CAFE-3, FY28 से FY32 तक के लिए निर्धारित है। सरकार द्वारा पेनल्टी संरचना को बेहतर बनाने और क्रेडिट रजिस्ट्री लागू करने की यह पहल, वाहन ईंधन दक्षता मानकों के पालन को प्रोत्साहित करने और साथ ही एक अधिक सुगम अनुपालन मार्ग प्रदान करने की दिशा में एक ठोस प्रयास को दर्शाती है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के पिछले निर्देश में एक स्पष्ट पेनल्टी वसूली तंत्र (penalty recovery mechanism) की आवश्यकता पर जोर दिया गया था, जिसे इस संशोधन से संबोधित किया गया है।