इलेक्ट्रिक व्हीकल और एनर्जी स्टोरेज सेक्टर को बड़ी राहत मिली है। यूनियन कैबिनेट ने **₹17,314 करोड़** के पैकेज को मंजूरी दे दी है, साथ ही चीनी आयात से निपटने के लिए बैटरी कंपोनेंट्स पर **50%** सब्सिडी पर भी विचार चल रहा है।
भारत सरकार ने घरेलू बैटरी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए कमर कस ली है। 4 नवंबर 2026 को यूनियन कैबिनेट ने दो महत्वपूर्ण वित्तीय पैकेजों को हरी झंडी दिखाई है। इसमें ₹2,814 करोड़ का कैपिटल स्पेंडिंग प्रोग्राम लिथियम और निकल जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग के लिए है। वहीं, ₹14,500 करोड़ की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) का इस्तेमाल 92 GWh की ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित करने के लिए किया जाएगा।
क्यों है ये सब्सिडी जरूरी?
भारी उद्योग मंत्रालय अब एक नई योजना पर काम कर रहा है, जिसमें बैटरी के जरूरी पार्ट्स जैसे कैथोड, एनोड, सेपरेटर्स और इलेक्ट्रोलाइट्स बनाने वाली कंपनियों को 50% तक कैपिटल सब्सिडी दी जा सकती है। वर्तमान में भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को चीनी कंपनियों के मुकाबले 18% से 61% तक ज्यादा लागत का सामना करना पड़ रहा है, जिसे कम करने के लिए यह एक रणनीतिक कदम है।
चीन की मोनोपोली पर लगाम की कोशिश
फिलहाल, LFP कैथोड जैसे जरूरी पार्ट्स में चीन की हिस्सेदारी 99% से भी ज्यादा है। सरकार चाहती है कि 2030 तक कच्चे माल की बढ़ती मांग को देखते हुए भारत अपनी निर्भरता को खत्म करे और एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) सेक्टर को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखे।
निवेशकों के लिए सावधानी
हालांकि यह फंड्स एक बड़ा बूस्ट है, लेकिन निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि पिछली PLI योजनाओं का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि कैपेसिटी डिप्लॉयमेंट में समय लग सकता है। कंपनियों की सफलता केवल सरकारी सब्सिडी पर नहीं, बल्कि कच्चे माल की आपूर्ति सुरक्षित करने और टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करने पर निर्भर करेगी। अगला बड़ा अपडेट सरकार द्वारा इस 50% सब्सिडी की गाइडलाइंस जारी करने के बाद ही आएगा।
