रिकॉर्ड तोड़ बिक्री से हुई FY27 की शुरुआत
वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) की शुरुआत भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक रही। अप्रैल में रिकॉर्ड तोड़ रिटेल बिक्री दर्ज की गई, जो कि इस महीने का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के अनुसार, कुल वाहन पंजीकरण में पिछले साल की तुलना में 12.94% की बढ़ोतरी हुई और यह 2.61 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया।
टू-व्हीलर्स (+13.01%), पैसेंजर व्हीकल्स (+12.21%), कमर्शियल व्हीकल्स (+15.02%), थ्री-व्हीलर्स (+7.19%) और ट्रैक्टर (+23.22%) जैसे अधिकांश सेगमेंट में जोरदार साल-दर-साल (Year-on-Year) बढ़ोतरी देखी गई। पैसेंजर व्हीकल्स के लिए इन्वेंटरी स्तर भी काफी सुधरा है, जो लगभग 28-30 दिनों पर स्थिर है। इसका मतलब है कि डिमांड के हिसाब से सप्लाई बेहतर है। होलसेल (Wholesale) आंकड़ों ने भी इस मजबूती को दिखाया, जिसमें पैसेंजर व्हीकल डिस्पैच में पिछले साल के मुकाबले लगभग 25% की बढ़ोतरी हुई। शहरी डिमांड और SUV की बढ़ती लोकप्रियता इसके मुख्य कारण रहे।
लागतों में उछाल और डिमांड पर मंडराता खतरा
हालांकि, इस शानदार शुरुआत के पीछे कुछ चिंताएं भी छिपी हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण कच्चे माल की लागत में भारी उछाल आया है। स्टील, मेटल और प्लास्टिक जैसे मैटेरियल्स की कीमतें 10% से 34% तक बढ़ी हैं। साथ ही, एमिशिन कंट्रोल सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली कीमती धातुओं की लागत भी बढ़ी है। यह लागत वृद्धि (Cost Inflation) कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल रही है और सप्लाई चेन में संभावित रुकावटों को लेकर चिंता बढ़ा रही है।
इसके अलावा, अल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभाव से ग्रामीण मांग (Rural Demand) पर भी असर पड़ने का अनुमान है। अनुमान है कि ट्रैक्टर इंडस्ट्री की ग्रोथ FY27 में केवल 0-2% रह सकती है, क्योंकि कमजोर मॉनसून का डर किसानों की आय और ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों की मांग को प्रभावित कर सकता है। इन सप्लाई चेन की कमजोरियों और बाहरी जोखिमों के चलते, रेटिंग एजेंसी ICRA ने FY27 के लिए सेक्टर की समग्र ग्रोथ का अनुमान घटाकर 3-5% कर दिया है, जो FY26 की मजबूत ग्रोथ से कम है।
इसके बावजूद, डीलरों का भरोसा बना हुआ है और ज्यादातर डीलर आने वाले महीनों और पूरे FY27 में ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। यानी, अंदरूनी मांग (Structural Demand) मजबूत बनी हुई है। हालांकि, इंडस्ट्री को इनपुट कॉस्ट इन्फ्लेशन (Input Cost Inflation), सप्लाई चेन की अस्थिरता और ग्रामीण मांग में बदलाव जैसी चुनौतियों से पार पाना होगा।
