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India Auto Sector Record: FY26 में 4.7 मिलियन यूनिट्स बिकीं, टैक्स कटौती और EV बूम ने मचाया धमाल!

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Auto Sector Record: FY26 में 4.7 मिलियन यूनिट्स बिकीं, टैक्स कटौती और EV बूम ने मचाया धमाल!
Overview

भारतीय ऑटो सेक्टर ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में बिक्री के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। घरेलू पैसेंजर व्हीकल सेल्स **4.7 मिलियन** यूनिट्स के पार पहुँच गई, जो पिछले साल के मुकाबले **16%** से ज्यादा की जोरदार बढ़ोतरी है। इस उछाल का मुख्य कारण सितंबर 2025 के बाद लागू हुई टैक्स कटौती और नए मॉडल्स का लॉन्च रहा।

रिकॉर्ड तोड़ बिक्री की वजहें

FY26 में भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों की डोमेस्टिक पैसेंजर व्हीकल सेल्स 4.7 मिलियन यूनिट्स तक पहुंच गई, जो साल-दर-साल 16.3% की जबरदस्त बढ़ोतरी है। सितंबर 2025 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) में बड़ी कटौती के बाद गाड़ियों की अफॉर्डेबिलिटी बढ़ी, जिसने डिमांड को नई ऊंचाई दी। मार्केट लीडर Maruti Suzuki ने FY26 में 1.86 मिलियन यूनिट्स की अब तक की सबसे ज्यादा डोमेस्टिक सेल्स दर्ज की, साथ ही 447,774 यूनिट्स एक्सपोर्ट भी कीं। Mahindra & Mahindra ने भी सालाना सेल्स में रिकॉर्ड बनाया और 660,276 यूनिट्स बेचकर दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि Tata Motors ने 631,387 यूनिट्स बेचीं।

बढ़ती लागत और ग्लोबल टेंशन का साया

हालांकि डिमांड मजबूत बनी हुई है, लेकिन ऑटो इंडस्ट्री पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष जैसी ग्लोबल भू-राजनीतिक घटनाओं पर बारीकी से नजर रख रही है, क्योंकि इनसे सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। दिसंबर 2025 के बाद से कमोडिटी की कीमतें भी बढ़ी हैं, जिससे मैन्युफैक्चरर्स पर दबाव है। माना जा रहा है कि कंपनियां लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकती हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती और ऊंची इनकम टैक्स स्लैब ने ईएमआई (EMI) को सस्ता किया है, जिससे टैक्स कटौती के साथ-साथ वाहनों की अफॉर्डेबिलिटी और बढ़ी है।

ग्रीन टेक्नोलॉजी की बढ़ती मांग: EV और CNG की धूम

इस ग्रोथ में एक अहम फैक्टर ग्राहकों का ग्रीन व्हीकल्स की ओर बढ़ता रुझान है। CNG व्हीकल्स की सेल्स में 20% का उछाल देखा गया, और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) की बिक्री फाइनेंशियल ईयर में 200,000 यूनिट्स के पार कर गई। Tata Motors की EV सेल्स 43.32% बढ़कर 92,120 यूनिट्स तक पहुंच गई। नए प्रोडक्ट्स और ग्राहकों के बढ़ते भरोसे ने EV एडॉप्शन को बढ़ावा दिया है। Hyundai Motor India ने भी FY26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में अपनी सबसे बेहतरीन डोमेस्टिक सेल्स हासिल की।

प्रमुख कंपनियों का वैल्यूएशन और एनालिस्ट्स की राय

अप्रैल 2026 तक, प्रमुख ऑटो कंपनियों का P/E रेश्यो मिला-जुला रहा। Maruti Suzuki लगभग 26.08x, Tata Motors करीब 25.47x, और Mahindra & Mahindra करीब 24.42x पर ट्रेड कर रहे हैं। Hyundai Motor India का P/E रेश्यो लगभग 27.0x है। एनालिस्ट्स आमतौर पर Maruti Suzuki और Mahindra & Mahindra को लेकर पॉजिटिव हैं, जिनकी रेटिंग 'Buy' और 'Strong Buy' है। Hyundai Motor India को भी अच्छी कवरेज मिल रही है। Tata Motors Passenger Vehicles का P/E रेश्यो 17.64x है, जो इंडस्ट्री एवरेज 23.50x से कम है, जिससे यह वैल्यूएशन डिस्काउंट पर दिखती है, हालांकि स्टॉक ने पिछले साल अच्छा प्रदर्शन नहीं किया।

संभावित जोखिम और इंडस्ट्री की कमजोरियां

रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद, इंडस्ट्री कुछ कमजोरियों का सामना कर रही है। GST कट्स जैसे पॉलिसी सपोर्ट पर निर्भरता भविष्य की फिस्कल पॉलिसी पर निर्भर करती है। बढ़ती कमोडिटी प्राइसेस सीधे प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकती हैं। भू-राजनीतिक अस्थिरता, खासकर पश्चिम एशिया में, फ्यूल प्राइसेस बढ़ा सकती है, जिसका असर कंज्यूमर खर्च पर पड़ सकता है। EV एडॉप्शन बढ़ रहा है, लेकिन ऊंची शुरुआती लागत और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी अभी भी बाधाएं हैं। Tata Motors और Mahindra & Mahindra जैसी कंपनियां EV और SUVs में भारी निवेश कर रही हैं, जिसमें कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेंडिचर) और एग्जीक्यूशन का रिस्क शामिल है। Hyundai की सेल्स कुछ खास मॉडल्स पर केंद्रित होना भी एक संभावित रिस्क है। पैसेंजर व्हीकल मार्केट काफी कॉम्पिटिटिव है, जिसमें प्राइसिंग प्रेशर बहुत ज्यादा है।

आगे का आउटलुक: निरंतर ग्रोथ और अनुकूलन की उम्मीद

आने वाले समय में, इंडस्ट्री डिमांड की रफ्तार बनाए रखने की उम्मीद कर रही है। भू-राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए, चालू फाइनेंशियल ईयर में करीब 5% ग्रोथ का अनुमान है। SUVs की तरफ लगातार बढ़ता झुकाव, साथ ही CNG और EV सेगमेंट्स की ग्रोथ, प्रमुख चालक बने रहने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स ने Maruti Suzuki (औसतन ₹17,255) और Mahindra & Mahindra (औसतन ₹4,297.53) के लिए पॉजिटिव प्राइस टारगेट बनाए रखे हैं, जो उनके लॉन्ग-टर्म Prospects पर भरोसा दिखाते हैं। लागत दबाव, भू-राजनीतिक जोखिमों और टेक्नोलॉजिकल बदलावों के प्रति इंडस्ट्री की अनुकूलन क्षमता उसकी ग्रोथ को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगी।

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