भारत के ऑटो सेक्टर में फेस्टिवल सीजन की शुरुआत हो चुकी है, जहां टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन में **23%** की बड़ी बढ़त दर्ज की गई है। वहीं, पैसेंजर व्हीकल की रफ्तार धीमी पड़कर **7%** पर आ गई है, जो खरीदारों के बदलते मिजाज की ओर इशारा करती है।
भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में फेस्टिवल सीजन के पहले हफ्ते में अलग-अलग सेगमेंट की कहानी अलग देखने को मिली है। एक तरफ टू-व्हीलर कंपनियां डिमांड में मजबूती देख रही हैं, वहीं पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री में इस साल की शुरुआती तेजी के मुकाबले अब सुस्ती के संकेत हैं।
टू-व्हीलर सेगमेंट और रूरल डिमांड
टू-व्हीलर सेगमेंट इस बार मार्केट का लीडर बनकर उभरा है। पिछले साल के मुकाबले रजिस्ट्रेशन में 23% की बढ़त दर्ज की गई है। निवेशकों के लिए यह आंकड़ा ग्रामीण भारत की आर्थिक सेहत समझने का एक बड़ा जरिया है, क्योंकि टू-व्हीलर की मांग मुख्य रूप से रूरल और सेमी-अर्बन इलाकों से आती है। इस बढ़त का फायदा Hero MotoCorp, Bajaj Auto और TVS Motor Company जैसी प्रमुख कंपनियों को मिल सकता है।
पैसेंजर व्हीकल्स की रफ्तार क्यों कम हुई?
इसके उलट, पैसेंजर व्हीकल्स (कारें) की बिक्री में केवल 7% का इजाफा हुआ है। गौर करने वाली बात यह है कि अप्रैल से सितंबर के बीच यह सेगमेंट 28% से 29% की रफ्तार से दौड़ रहा था। फेस्टिवल सीजन 11 नवंबर तक चलेगा, इसलिए निवेशक यह नजर रख रहे हैं कि यह सुस्ती सिर्फ इन्वेंट्री मैनेजमेंट का मामला है या फिर शहरी इलाकों में हाई-एंड गाड़ियों की डिमांड वाकई ठंडी पड़ रही है। Maruti Suzuki, Tata Motors और Mahindra & Mahindra जैसे शेयरों पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है।
कमर्शियल व्हीकल और ट्रैक्टर का हाल
कमर्शियल व्हीकल्स, खासकर ट्रकों की बिक्री में 101% का सालाना उछाल दिखा है। लेकिन इसे समझना जरूरी है, क्योंकि पिछले साल इसी अवधि में इसमें 32% की गिरावट आई थी। इसलिए यह रिकवरी एक कम बेस की वजह से है, न कि फ्रेट डिमांड में भारी उछाल की वजह से। वहीं, ट्रैक्टर सेगमेंट में भी 28% की अच्छी ग्रोथ देखी गई है।
हालांकि, बाजार के जानकारों का मानना है कि दूसरी छमाही में सतर्क रहने की जरूरत है। कमजोर मॉनसून का असर रूरल डिमांड पर पड़ सकता है, जिससे सेल्स वॉल्यूम को बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
