भारत में पैसेंजर व्हीकल की बिक्री ने अप्रैल से अगस्त के बीच **28%** की शानदार तेजी दर्ज की है। छोटी कारों पर GST घटकर **18%** होने के बाद पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है, जिसका सीधा फायदा Maruti Suzuki, Tata Motors और Mahindra & Mahindra जैसी बड़ी कंपनियों को मिल रहा है।
भारत के ऑटो सेक्टर में एक नई जान फुक गई है। अप्रैल से अगस्त के बीच पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री ने 28% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की है। इस तेजी के पीछे का सबसे बड़ा कारण सरकार द्वारा छोटी कारों (4 मीटर से कम लंबाई वाली) पर GST को 28% से घटाकर 18% करना है। इससे एंट्री-लेवल कारें आम आदमी के बजट में आ गई हैं।
वॉल्यूम ग्रोथ में GST का जादू
पिछले फाइनेंशियल ईयर में जिस मास-मार्केट सेगमेंट की डिमांड सुस्त थी, आज वही सेक्टर ग्रोथ का इंजन बना हुआ है। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी Maruti Suzuki की बात करें, तो यहां पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों का हिस्सा बढ़कर 54% हो गया है, जो पिछले साल 42% था। यह साबित करता है कि कंपनी अपने मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए नई डिमांड को बखूबी भुना रही है।
SUV का दबदबा बरकरार
भले ही एंट्री-लेवल कारों में रौनक लौटी हो, लेकिन ग्राहकों का रुझान अभी भी SUV की तरफ ज्यादा है। Tata Motors अपने Punch और Nexon जैसे मॉडल्स के साथ मार्केट में लगातार मजबूत बनी हुई है। वहीं, Mahindra & Mahindra ने अपनी Bolero Neo और XUV 3XO की दम पर एंट्री-लेवल यूटिलिटी व्हीकल सेल्स में 19.8% की बढ़ोतरी दर्ज की है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि यह वॉल्यूम ग्रोथ कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर कैसा असर डालती है। हालांकि ज्यादा सेल्स से फिक्स्ड कॉस्ट का बोझ कम होता है, लेकिन कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और तगड़ा कॉम्पिटिशन हमेशा चुनौती बना रहता है। अब मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह डिमांड आने वाले महीनों में भी बनी रहती है और क्या कंपनियां इसे बेहतर ऑपरेटिंग मार्जिन में बदल पाती हैं।
