भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने फाइनेंशियल ईयर **2027** की पहली छमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। इस दौरान कुल **1.58 करोड़** यूनिट्स की बिक्री हुई, जिसमें **20%** का भारी उछाल देखने को मिला है।
भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए चालू फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत बेहद मजबूत रही है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर की अवधि में कुल होलसेल बिक्री 1,58,00,017 यूनिट्स रही है, जो पिछले साल के 1,31,91,741 यूनिट्स के मुकाबले 20% अधिक है। यह ग्रोथ शहरी और ग्रामीण, दोनों बाजारों में कंज्यूमर डिमांड का नतीजा है।
सेगमेंट के आधार पर प्रदर्शन
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट ने 31% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है, जिसके तहत 13,60,687 गाड़ियां डिस्पैच हुईं। इसके अलावा, कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में 28.7% का उछाल देखा गया और कुल बिक्री 3,09,063 यूनिट्स रही, जो इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च का संकेत है।
टू-व्हीलर सेगमेंट, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर माना जाता है, उसमें 15.2% की बढ़त के साथ 64,32,842 यूनिट्स बिकीं। वहीं, थ्री-व्हीलर सेगमेंट में भी 23.6% का इजाफा हुआ है। जानकारों का मानना है कि GST 2.0 के लागू होने से गाड़ियों की कीमतें किफायती हुई हैं, जिससे ग्राहकों की पहुंच बढ़ी है।
आगे क्या है रिस्क?
भले ही सेक्टर ने मजबूती दिखाई है, लेकिन फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही के लिए आउटलुक में सावधानी बरती जा रही है। ग्लोबल इकोनॉमी की अनिश्चितता और रॉ मटेरियल की कीमतों में बदलाव प्रोडक्शन कॉस्ट पर असर डाल सकते हैं। साथ ही, इलेक्ट्रिक और अल्टरनेटिव फ्यूल व्हीकल्स की तरफ बढ़ता रुझान आने वाले समय में कंपनियों के लिए नई चुनौतियां और अवसर लेकर आएगा।
