भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए अच्छी खबर है! फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1) में कुल ऑटो बिक्री **21.4%** बढ़कर **73,81,656** यूनिट्स पर पहुंच गई। वहीं, जून महीने में पैसेंजर व्हीकल्स (PVs) की बिक्री में **24.1%** का ज़बरदस्त उछाल आया, जो **3,88,144** यूनिट्स रही।
Q1 में ऑटो सेक्टर की धांसू परफॉरमेंस
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के मुताबिक, इस तिमाही में पैसेंजर व्हीकल्स, टू-व्हीलर्स और कमर्शियल व्हीकल्स – सभी सेगमेंट्स ने शानदार ग्रोथ दिखाई है। यह बढ़ती डिमांड, नए मॉडल्स के लॉन्च और स्टेबल फाइनेंसिंग कॉस्ट का नतीजा है।
जून के आंकड़े क्या कहते हैं?
जून में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री 24.1% बढ़कर 3,88,144 यूनिट्स पर पहुंच गई। टू-व्हीलर सेगमेंट में भी 18.6% की बढ़ोतरी देखी गई, जिसकी कुल बिक्री 18,51,400 यूनिट्स रही। इसमें स्कूटर और मोपेड्स की डिमांड खास तौर पर बढ़ी, जिनकी बिक्री क्रमश: 39.1% और 50.4% चढ़ी।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का बढ़ता क्रेज
थ्री-व्हीलर सेगमेंट में भी 26.1% की ग्रोथ के साथ 77,951 यूनिट्स की बिक्री हुई। खास बात यह है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ई-रिक्शा की बिक्री में 52.4% और ई-कार्ट की बिक्री में 19.7% का इजाफा हुआ है। यह दिखाता है कि कमर्शियल ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को अपना रहे हैं।
आगे की राह और चुनौतियां
हालांकि, इस ग्रोथ के बीच ऑटो कंपनियों के लिए कुछ चुनौतियां भी हैं। कच्चे माल, जैसे स्टील और एल्यूमीनियम, की बढ़ती कीमतों से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ सकती है, जिससे प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है। SIAM और इंडस्ट्री लीडर्स ने इस बात पर चिंता जताई है।
इसके अलावा, मॉनसून की प्रगति और ग्लोबल सप्लाई चेन जैसे फैक्टर भी सेक्टर के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि ऑटो कंपनियां त्योहारी सीजन से पहले इन लागतों को कैसे मैनेज करती हैं और डिमांड को बनाए रख पाती हैं या नहीं।
