कमर्शियल व्हीकल्स (CV) की खुदरा बिक्री में अप्रैल 2026 में पिछले साल की तुलना में 15.02% की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई। खासकर मीडियम कमर्शियल व्हीकल्स (MCVs) ने 27% की शानदार ग्रोथ दर्ज की, जो बताता है कि अब माल ढुलाई (freight logistics) में मध्यम दूरी और क्षेत्रीय व्यापार का महत्व बढ़ रहा है। Tata Motors ने 20.3% ग्रोथ के साथ अपनी लीडरशिप बरकरार रखी, वहीं VE Commercial Vehicles ने इंडस्ट्री से बेहतर 18.3% की ग्रोथ हासिल की। Eicher ब्रांड की डोमेस्टिक बिक्री 8.6% बढ़ी और Volvo डिवीजन में 23.3% की तेजी आई, लेकिन Ashok Leyland को मार्केट शेयर गंवाना पड़ा।
ग्रामीण मांग (rural demand) का दम इस बार ट्रैक्टर सेल्स में दिखा, जहां 23.22% की बंपर ग्रोथ के साथ 75,109 यूनिट्स बिकीं। यह इस सेगमेंट की सबसे तेज ग्रोथ रही। Mahindra ने 42% की मार्केट हिस्सेदारी के साथ दबदबा बनाए रखा, जबकि CNH Industrial ने 50% से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की। पैसेंजर व्हीकल की बात करें तो ग्रामीण इलाकों में बिक्री 20.4% रही, जो शहरों की 7.1% ग्रोथ से कहीं ज्यादा है। बेहतर फसल और बढ़ती आय ने ग्रामीण खर्च को बढ़ावा दिया है।
हालांकि, मजबूत बिक्री के बावजूद, डीलर के पास इन्वेंटरी (inventory) का लेवल बढ़कर 28-30 दिनों तक पहुंच गया है, जो FADA के पसंदीदा लेवल से थोड़ा ऊपर है। मार्च की तुलना में अप्रैल में रिटेल सेल्स में लगभग 3% की मामूली गिरावट दिखी, जिसे डीलर्स साल के अंत के बाद आने वाली सामान्य मंदी बता रहे हैं। इसके अलावा, ऑटो इंडस्ट्री नई 'End-of-Life Vehicles' (ELV) नियमों और TREM Stage V जैसे नए एमिशन स्टैंडर्ड्स के कारण लागत बढ़ने की संभावना से जूझ रही है। Force Motors और SML Isuzu जैसी छोटी कंपनियों को वॉल्यूम में बड़ी गिरावट और मार्केट शेयर में भारी नुकसान झेलना पड़ा।
इन सब के बीच, डीलर्स का भरोसा अभी भी काफी मजबूत है। 55% से ज्यादा डीलर आने वाले महीनों में ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं और FY27 के लिए अपने अनुमानों को बढ़ा रहे हैं। FY26 की दूसरी छमाही में दिखी मजबूत अंडरलाइंग डिमांड नए फाइनेंशियल ईयर में भी जारी रहने की उम्मीद है।
