दाम बढ़े, डिस्काउंट घटे: फिर भी बिक्री रिकॉर्ड पर
Jato Dynamics के आंकड़ों के मुताबिक, FY26 में भारत का पैसेंजर व्हीकल मार्केट 13% की सालाना ग्रोथ के साथ 47 लाख यूनिट्स के पार पहुंच गया। इस रिकॉर्ड बिक्री की मुख्य वजह रही कि कार कंपनियों ने कीमतें बढ़ाईं और डिस्काउंट काफी कम कर दिए। मास-मार्केट गाड़ियों की कीमतें औसतन 4.3% बढ़ीं, जबकि ग्राहक छूट 4.6% घटी। लग्जरी सेगमेंट में तो कीमतें 8.9% बढ़ाई गईं और ऑफर्स 18% तक घटा दिए गए। इससे साफ है कि बाजार में डिमांड इतनी स्ट्रॉन्ग थी कि दाम बढ़ाने के बाद भी बिक्री पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
SUVs का जलवा, प्रीमियम सेगमेंट में बूम
इस प्रीमियम ट्रेंड को चलाने में स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल्स (SUVs) का बड़ा हाथ रहा। FY26 में पैसेंजर व्हीकल बिक्री में SUVs का हिस्सा करीब 56% रहा, जो FY25 में 54% था। 2019 में जहां SUVs का मार्केट शेयर सिर्फ 23% था, वहीं 2024 तक यह 50% से ऊपर निकल गया। SUVs की कीमत ज्यादा होती है और फीचर्स भी बेहतर, इसलिए ये इंडस्ट्री के ओवरऑल ट्रांजेक्शन वैल्यू को बढ़ा रहे हैं। डीलर्स बताते हैं कि आजकल ग्राहक डिस्काउंट की बजाय फीचर्स देखकर गाड़ी चुन रहे हैं और बेहतर फाइनेंसिंग ऑप्शन की वजह से अपग्रेड भी कर रहे हैं।
आर्थिक मजबूती ने बढ़ाई खरीदने की क्षमता
कई इकोनॉमिक फैक्टर्स और सरकारी नीतियों ने ग्राहकों की परचेजिंग पावर को सपोर्ट किया है। सितंबर 2025 से लागू हुए 'GST 2.0' जैसे लोअर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) रेट्स की वजह से मास-मार्केट गाड़ियां ज्यादा अफोर्डेबल हुईं। पर्सनल इनकम टैक्स में राहत मिलने से भी मिडिल क्लास परिवारों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ी। फरवरी 2026 में इन्फ्लेशन (Inflation) थोड़ा बढ़कर 3.21% रहा और रेपो रेट (Repo Rate) 5.25% पर स्थिर रहा, इसके बावजूद कंज्यूमर सेंटिमेंट (Consumer Sentiment) पॉजिटिव बना रहा। अनुमान है कि FY27 में इकोनॉमी 6.9% की दर से ग्रो करेगी।
भविष्य के जोखिम: प्राइसिंग पावर पर खतरा, ग्रोथ स्लो होने की आशंका
लेकिन, अब इन रिकॉर्ड बिक्री और मजबूत प्राइसिंग पावर के टिकाऊपन पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। वेस्ट एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) के चलते क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतें $104 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। इससे फ्रेट और कमोडिटी कॉस्ट बढ़ सकती है, प्रोडक्शन एक्सपेंस बढ़ेंगे और ग्राहकों की खर्च करने की क्षमता घट सकती है। सप्लाई चेन (Supply Chain) की दिक्कतें भी बढ़ रही हैं, 17% डीलर्स ने बड़ी समस्याओं की रिपोर्ट की है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि FY27 में पैसेंजर व्हीकल ग्रोथ घटकर 3-6% रह जाएगी, जो FY26 के मुकाबले काफी कम है। यह स्लोडाउन हाई बेस, पेंड-अप डिमांड का पूरा होना और ग्लोबल अनिश्चितताओं के कारण है। Maruti Suzuki (जिनका P/E Ratio करीब 27.5-29.8 है) और Tata Motors (जिनका P/E Ratio करीब 20.6-55.9 है) जैसे स्टॉक्स के वैल्यूएशन बताते हैं कि निवेशक भविष्य में ग्रोथ की उम्मीद तो कर रहे हैं, पर बढ़ती लागत और घटती डिमांड के चलते कमाई की सस्टेनेबिलिटी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
FY27 के लिए धीमी लेकिन स्थिर ग्रोथ का अनुमान
FY27 को देखते हुए, ग्रोथ की रफ्तार धीमी रहने की उम्मीद है। प्रीमियमाइजेशन, SUVs की पॉपुलैरिटी और अल्टरनेटिव पावरट्रेन (CNG, EVs) की ओर शिफ्ट जैसे फैक्टर डिमांड को सपोर्ट करते रहेंगे, लेकिन ओवरऑल पेस कम होगा। इंडस्ट्री इन्फ्लेशन, इंटरेस्ट रेट्स और जियोपॉलिटिकल इवेंट्स पर कड़ी नजर रखेगी। मैन्युफैक्चरर्स का फोकस सप्लाई चेन की अस्थिरता को मैनेज करने और बदलती इकोनॉमिक कंडीशन में प्राइस डिसिप्लिन बनाए रखने पर होगा।