भारतीय ऑटो मार्केट में बड़ा बदलाव आया है। अगस्त 2026 में पहली बार CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल हिस्सेदारी **42%** हो गई है, जिसने पेट्रोल कारों (**41%**) को पीछे छोड़ दिया है। रिटेल सेल्स में **16%** की सालाना बढ़ोतरी देखी गई है।
भारतीय ऑटो सेक्टर में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। अगस्त 2026 में क्लीन-फ्यूल विकल्पों, जैसे कि CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) ने कुल मार्केट का 42% हिस्सा अपने नाम कर लिया है, जबकि पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी 41% रही। यह बदलती उपभोक्ता पसंद का सीधा असर है।
पेट्रोल से क्यों दूर हो रहे ग्राहक?
रिटेल सेल्स में 16% की सालाना बढ़त के पीछे जीएसटी (GST) दरों में बदलाव और ग्राहकों की बेहतर क्रय शक्ति का हाथ है। हालांकि, पेट्रोल से दूरी का एक बड़ा कारण E20 फ्यूल (20% इथेनॉल मिला हुआ) को लेकर ग्राहकों की चिंता है। इंजन में खराबी, जंग और कम माइलेज के डर से खरीदार अब CNG और EV का रुख कर रहे हैं। गौरतलब है कि अकेले CNG ने 25% का रिकॉर्ड मार्केट शेयर हासिल किया है।
EV मार्केट: टाटा का दबदबा, MG के लिए चुनौती
इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार भी तेज है। अगस्त में EV सेल्स 52% बढ़कर 30,700 यूनिट्स पर पहुंच गई। नेशनल लेवल पर EV पेनिट्रेशन 7.7% है, जो अगस्त 2025 में 5.9% था। दिल्ली इसमें सबसे आगे है, जहां 19% पेनिट्रेशन देखा गया है।
मुकाबला अब और कड़ा हो गया है। Tata Motors करीब 43.8% मार्केट शेयर के साथ EV सेक्टर में राजा बना हुआ है। वहीं, JSW MG Motor का मार्केट शेयर पिछले साल के 28% से गिरकर 15% पर आ गया है, जो बताता है कि नई कंपनियों के लिए अपनी जगह बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कौन सी कंपनियां अपने पोर्टफोलियो में क्लीन-फ्यूल को कितनी मजबूती से शामिल कर रही हैं। पारंपरिक पेट्रोल-ओनली मॉडल बेचने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, EV मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा से कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ना तय है। अब ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां बिना कस्टमर्स खोए उन्हें पेट्रोल से क्लीन-फ्यूल की तरफ कितनी कुशलता से शिफ्ट कर पाती हैं।
