सितंबर 2026 के ऑटो रिटेल डेटा में भारी अंतर देखने को मिला है। जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर डिमांड के दम पर कमर्शियल गाड़ियों (CV) की बिक्री में उछाल आया है, वहीं मानसून के बदलते मिजाज के कारण ट्रैक्टर की बिक्री में मंथ-ऑन-मंथ गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ का आंकड़ा 2025 के 'लो बेस इफेक्ट' (Low Base Effect) की वजह से भी प्रभावित है।
सितंबर 2026 में भारत के ऑटो रिटेल सेक्टर में दो अलग-अलग रुझान देखे गए हैं। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के आंकड़ों के अनुसार, कमर्शियल व्हीकल (CV) रजिस्ट्रेशन में सालाना आधार पर 37.62% की बढ़ोतरी हुई है, जो 1,00,000 यूनिट के आंकड़े को पार कर गई है। इसके उलट, ट्रैक्टर की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 13.75% की बढ़त जरूर दिखी है, लेकिन अगस्त के मुकाबले यह 12.58% नीचे खिसक गई है।
ट्रकों की मांग के पीछे का दम
कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में यह तेजी मुख्य रूप से देश में जारी बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, माइनिंग और कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी की देन है। स्टील, सीमेंट और रॉ मैटेरियल की ढुलाई के लिए हैवी कमर्शियल गाड़ियों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। इसे अक्सर देश की आर्थिक सक्रियता का बैरोमीटर माना जाता है।
ग्रामीण मांग और मानसून का असर
ट्रैक्टर सेगमेंट के लिए माहौल थोड़ा जटिल बना हुआ है। मानसून की अनियमित बारिश और फेस्टिव सीजन के कैलेंडर में बदलाव ने ग्रामीण मांग को प्रभावित किया है। ट्रैक्टर की बिक्री ग्रामीण आय और फसल चक्र से जुड़ी होती है, इसलिए इसमें अस्थिरता ज्यादा देखने को मिल रही है।
निवेशकों के लिए 'लो बेस' की चेतावनी
निवेशकों को इन आंकड़ों को देखते समय सावधानी बरतनी चाहिए। सितंबर 2026 की सालाना ग्रोथ में 2025 के लो बेस का असर है। सितंबर 2025 में जीएसटी नीति और अन्य रेगुलेटरी बदलावों के चलते गाड़ियों की खरीद टाल दी गई थी, जिससे बिक्री का बेस काफी नीचे था। इस वजह से मौजूदा ग्रोथ प्रतिशत में थोड़ी तेजी ज्यादा दिख रही है।
Mahindra & Mahindra का हाल
इस डायवर्जेंस का असर कंपनियों के प्रदर्शन पर भी दिख रहा है। उदाहरण के तौर पर, Mahindra & Mahindra की ट्रैक्टर बिक्री में सालाना आधार पर 21% की गिरावट आई, जबकि कंपनी के ऑटो बिजनेस (SUV और लाइट कमर्शियल व्हीकल) में 15% का इजाफा दर्ज किया गया।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या औद्योगिक मांग की यह रफ्तार बरकरार रहती है और फेस्टिव सीजन के दौरान ग्रामीण खपत में कितनी रिकवरी आती है। इसके अलावा, पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में डीलरों के पास इन्वेंट्री लेवल अभी भी बेंचमार्क से ज्यादा है, जिस पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
