सितंबर 2026 में भारत में ऑटो रिटेल सेल्स ने **2.54 मिलियन** यूनिट्स के साथ नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जो पिछले साल के मुकाबले **31.82%** ज्यादा है। हालांकि, फेस्टिव डिमांड के बीच डीलर्स के पास गाड़ियों का स्टॉक **43-45 दिन** तक पहुंच गया है, जो **21 दिन** के सेफ्टी मार्क से काफी ऊपर है।
भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने सितंबर 2026 में अब तक की सबसे शानदार बिक्री दर्ज की है। Federation of Automobile Dealers Associations (FADA) के आंकड़ों के मुताबिक, कुल रिटेल सेल्स 25.37 लाख यूनिट्स रही। हालांकि, यह ग्रोथ पिछले साल सितंबर 2025 के लो बेस इफेक्ट का भी नतीजा है।
सेगमेंट-वाइज परफॉर्मेंस
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में 32.10% की उछाल देखी गई और बिक्री 4,27,213 यूनिट्स रही। टू-व्हीलर सेगमेंट में भी रौनक रही, जहां बिक्री 33.08% बढ़कर 1.79 मिलियन यूनिट्स को पार कर गई। प्रीमियम और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती मांग ने इसे सपोर्ट किया है। वहीं, कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट ने पहली बार सितंबर महीने में 1 लाख का आंकड़ा पार करते हुए 1,03,557 यूनिट्स की बिक्री की है, जिसके पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और माइनिंग गतिविधियों का बड़ा हाथ है।
इन्वेंट्री का बढ़ता संकट
रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद ऑटो सेक्टर के लिए 'हाई इन्वेंट्री' एक बड़ी चुनौती बन गई है। पैसेंजर व्हीकल के लिए इन्वेंट्री 43-45 दिन के स्तर पर है, जबकि इंडस्ट्री इसे 21 दिन तक ही सुरक्षित मानती है। निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि ज्यादा स्टॉक को क्लियर करने के लिए कंपनियां डिस्काउंट या डीलर्स को भारी इंसेंटिव दे सकती हैं, जिससे उनका ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन घट सकता है।
आगे क्या देखना होगा?
अब बाजार की नजर अक्टूबर-दिसंबर तिमाही पर है, जो त्योहारी सीजन के कारण ऑटो सेक्टर के लिए अहम है। अगर फेस्टिव सीजन में डिमांड के जरिए यह स्टॉक सामान्य होता है, तो आउटलुक बेहतर होगा। लेकिन अगर इन्वेंट्री का दबाव बना रहा, तो कंपनियों को प्रोडक्शन कट करना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर उनके शेयर प्राइस पर देखने को मिल सकता है।
