India Auto Industry: CAFE III नॉर्म्स पर घमासान, छोटी कारों के नियम बने सिरदर्द

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Auto Industry: CAFE III नॉर्म्स पर घमासान, छोटी कारों के नियम बने सिरदर्द
Overview

भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री इन दिनों नए कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE III) नॉर्म्स को लेकर अंदरूनी कलह का सामना कर रही है। खास तौर पर, छोटी और किफ़ायती कारों को नियमों में छूट देने के मसले पर कंपनियों के बीच गंभीर मतभेद उभर आए हैं।

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ऑटो इंडस्ट्री की नई 'फ्यूल एफिशिएंसी' पर बहस

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) अपने सदस्यों के बीच इन नए कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE III) नॉर्म्स को लागू करने की समय-सीमा पर चर्चा कर रहा है, लेकिन इस मामले पर कंपनियों के बीच असहमति काफी गहरी है।

छोटी कारों को छूट: कंपनियों में टकराव

CAFE III के तहत छोटी कारों के लिए छूट देने को लेकर एक बड़ा मतभेद सामने आया है। Maruti Suzuki और Toyota Kirloskar जैसी कंपनियां चाहती हैं कि कारों के वजन और कीमत के आधार पर उन्हें रियायत मिले। वहीं, Tata Motors, Mahindra, Hyundai और Kia जैसी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां इसका पुरजोर विरोध कर रही हैं। उनका तर्क है कि छोटी कारों के लिए अलग नियम उनकी सुरक्षा से समझौता कर सकते हैं, जो कि चिंता का विषय है।

डेडलाइन पर सरकार का रुख और इंडस्ट्री की तैयारी

SIAM के प्रेसिडेंट और Tata Motors पैसेंजर व्हीकल्स के हेड, शैलेश चंद्र ने बताया कि ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के साथ एक अहम मीटिंग जल्द ही तय है। उन्होंने ड्राफ्ट रूल्स या SIAM के अंतिम फैसले पर अधिक जानकारी नहीं दी। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि CAFE III स्टैंडर्ड्स 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की उम्मीद है, और इसमें किसी भी तरह की देरी की संभावना नहीं है। ऐसे में, इंडस्ट्री की तैयारी और सटीक शुरुआत की तारीख पर अभी भी चर्चा जारी है।

EV पॉलिसी पर भी SIAM का रुख

इसी संदर्भ में, शैलेश चंद्र ने दिल्ली EV पॉलिसी पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को अपनाने के लिए केवल आदेश के बजाय एक 'सक्षम माहौल' (enabling environment) बनाने की जरूरत है। SIAM शून्य-उत्सर्जन तकनीक के लिए रुकावटें कम करने, इंसेंटिव (incentives) और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने का समर्थन करता है, ताकि उपभोक्ता मांग स्वाभाविक रूप से बढ़े। यह भारत के स्वच्छ परिवहन की ओर बढ़ने के लक्ष्य के साथ इंडस्ट्री की व्यापक मांग के अनुरूप है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.