ग्रोथ में नरमी की वजह और भविष्य की राह
FY2026-27 के लिए ऑटो इंडस्ट्री का अनुमान है कि थोक वॉल्यूम में 3% से 6% की बढ़ोतरी होगी। यह सुस्ती पिछले फाइनेंशियल ईयर के मजबूत रिकवरी के बाद आई है, जो GST रेट में बदलाव, डिमांड में तेजी और बेहतर फाइनेंसिंग जैसे फैक्टर्स की वजह से हुई थी। लेकिन, अब कहानी सिर्फ साइक्लिकल रिकवरी से आगे बढ़कर स्ट्रक्चरल बदलावों की ओर बढ़ रही है। कंज्यूमर्स में प्रीमियम गाड़ियों की बढ़ती डिमांड और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EV) जैसे अल्टरनेटिव पावरट्रेन की ओर तेजी से झुकाव सेक्टर के मीडियम-टर्म आउटलुक को नया आकार दे रहा है। भले ही पिछली तिमाही के मुकाबले ग्रोथ के आंकड़े कम लगें, लेकिन ये अंदरूनी ट्रेंड्स नए मार्केट डायनामिक्स और इन्वेस्टमेंट के मौके बना रहे हैं।
सेक्टर्स में अलग-अलग प्रदर्शन और बढ़ती कीमतें
FY2026-27 के लिए अलग-अलग ऑटो सेक्टर्स में ग्रोथ का अनुमान भी अलग-अलग है। पैसेंजर व्हीकल (PV) में थोक बिक्री 4% से 6% बढ़ने की उम्मीद है, जो FY2025-26 में अनुमानित 5% से 7% से कम है। पर्सनल मोबिलिटी की लगातार डिमांड और अफोर्डेबिलिटी में सुधार इसके मुख्य कारण हैं। यूटिलिटी व्हीकल्स (UVs) नए लॉन्च और कंज्यूमर प्रेफरेंस के कारण आगे बढ़ रहे हैं। वहीं, टू-व्हीलर सेगमेंट में ग्रोथ FY2026-27 में घटकर 3% से 5% रहने का अनुमान है, जबकि FY2025-26 में यह 6% से 9% रहने का अनुमान था। एंट्री-लेवल से ज्यादा प्रीमियम मोटरसाइकिल और स्कूटर में रिकवरी मजबूत दिख रही है। कमर्शियल व्हीकल (CV) सेक्टर में FY2026-27 में कुल मिलाकर 4% से 6% ग्रोथ का अनुमान है, जिसमें बस वॉल्यूम 7% से 9% की मजबूत ग्रोथ दिखा सकते हैं।
हालांकि, एक बड़ी चिंता रेगुलेटरी कॉस्च के कारण व्हीकल की अफोर्डेबिलिटी पर पड़ने वाला असर है। लगातार रेगुलेटरी अपग्रेड्स, जिसमें नए एमिशन और सेफ्टी नॉर्म्स शामिल हैं, ने व्हीकल की कीमतों को स्ट्रक्चरली बढ़ा दिया है, जिसका असर खासकर कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट पर पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, कड़े एमिशन स्टैंडर्ड्स और ABS व AC केबिन जैसी अनिवार्य सेफ्टी फीचर्स ने पहले ही कीमतों में बढ़ोतरी की है और माना जा रहा है कि ये कमर्शियल व्हीकल्स की कीमतों में 10-12% और बढ़ोतरी कर सकते हैं। कीमतों का यह बढ़ता बोझ डिमांड को प्रभावित कर सकता है, खासकर प्राइस-सेंसिटिव सेगमेंट्स में।
EV ट्रांजिशन: उम्मीदें और चुनौतियां
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का बढ़ता इस्तेमाल एक बड़ा स्ट्रक्चरल थीम है, जिससे FY2030 तक सभी तरह के व्हीकल्स में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की उम्मीद है। टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स और बसेस इस बदलाव में सबसे आगे हैं, जबकि पैसेंजर कार्स और लाइट कमर्शियल व्हीकल्स में भी धीरे-धीरे एडॉप्शन बढ़ने का अनुमान है। इस ट्रांजिशन को सरकारी नीतियों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और बेहतर टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप (TCO) इकोनॉमिक्स का सपोर्ट मिल रहा है। महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के बावजूद, जैसे FY2030 तक पैसेंजर व्हीकल्स में 30% EV पेनिट्रेशन हासिल करना, मौजूदा एडॉप्शन रेट अभी कम है। 2024 में पैसेंजर EVs का एडॉप्शन दर लगभग 2.5% है। मुख्य बाधाएं अभी भी बनी हुई हैं, जिनमें EVs की हाई इनिशियल कॉस्ट, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और रेंज एंग्ज़ायटी (Range Anxiety) शामिल हैं। Maruti Suzuki जैसी बड़ी कंपनियां EV समेत मल्टी-टेक्नोलॉजी अप्रोच में इन्वेस्ट कर रही हैं ताकि बदलती डिमांड को पूरा किया जा सके।
वैल्यूएशन और रेगुलेटरी हेडविंड्स का जोखिम
इंडस्ट्री की ग्रोथ की अच्छी संभावनाओं के बावजूद, कुछ जोखिमों पर भी ध्यान देना जरूरी है। कई ऑटो स्टॉक्स का मौजूदा वैल्यूएशन महंगा लग रहा है। Maruti Suzuki का P/E लगभग 31.96, Mahindra & Mahindra का 26.88, Bajaj Auto का 28.40 और TVS Motor का 67.4 है। Tata Motors का P/E रिपोर्टिंग पीरियड के आधार पर 6.93 (TTM) से 61.58 तक है। Nifty Auto इंडेक्स का P/E 33.1 है, जो अपने ऐतिहासिक मीडियन से ऊपर है, जिसका मतलब है कि सेक्टर थोड़ा महंगा है।
इसके अलावा, रेगुलेटरी मैंडेट्स के कारण व्हीकल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, खासकर कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में, अफोर्डेबिलिटी के लिए सीधा खतरा है और यह डिमांड की तेजी को धीमा कर सकती है। ICRA का एनालिसिस बताता है कि इन रेगुलेटरी बदलावों से व्हीकल की कीमतों में स्ट्रक्चरली बढ़ोतरी हो रही है, जो तेज ग्रोथ को धीमा कर सकता है, भले ही इंफ्रा डेवलपमेंट और रिप्लेसमेंट साइकिल्स कुछ सपोर्ट प्रदान करें। इंडस्ट्री को तीव्र प्रतिस्पर्धा और बदलती कंज्यूमर प्रेफरेंस के बीच इन कॉस्ट प्रेशर को मैनेज करना होगा।