सरकार ने देश की चार बड़ी ऑटोमोटिव टेस्टिंग एजेंसियों को आधुनिक बनाने के लिए **₹776.29 करोड़** के निवेश को मंजूरी दी है। इस पहल का मकसद EV के सर्टिफिकेशन में लगने वाले समय को कम करना और भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है।
भारत सरकार ने देश भर की प्रमुख ऑटोमोटिव टेस्टिंग सुविधाओं को अपग्रेड करने के लिए ₹776.29 करोड़ के फंड को हरी झंडी दी है। इस राशि का उपयोग मानसेर में स्थित International Centre for Automotive Technology (ICAT), पुणे में Automotive Research Association of India (ARAI), चेन्नई स्थित Global Automotive Research Centre (GARC) और इंदौर के National Automotive Test Tracks (NATRAX) को आधुनिक बनाने में किया जाएगा।
टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में क्यों जरूरी है निवेश?
यह फंडिंग ₹11,900 करोड़ की विशाल 'PM E-Drive' स्कीम का हिस्सा है। अब तक EV के सर्टिफिकेशन में लगने वाला लंबा समय ऑटो कंपनियों के लिए सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था। नई तकनीक और आधुनिक टेस्टिंग लैब के जरिए सरकार अब इन साइकिलों को छोटा करने पर जोर दे रही है, ताकि नई गाड़ियां तेजी से मार्केट में आ सकें।
EV एडॉप्शन में तेजी
आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल से अगस्त FY27 के दौरान इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बाजार में पहुंच 9.9% रही है, जो पिछले साल 6.6% थी। वहीं, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के मामले में तो क्रांति जैसी स्थिति है, जहां L5 कैटेगरी का एडॉप्शन 31.7% से उछलकर 46.1% पर पहुंच गया है। सरकार ने टू-व्हीलर के लिए इंसेंटिव्स को मार्च 2028 तक बढ़ा दिया है और टारगेट क्षमता को दोगुना करके 45.8 लाख वाहन कर दिया है, जो 'मेक इन इंडिया' को नई ऊर्जा देगा।
