ऑटो सेक्टर में बंपर निवेश! सरकार ने PLI स्कीम के लिए खोला खजाना, मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी नई रफ्तार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
ऑटो सेक्टर में बंपर निवेश! सरकार ने PLI स्कीम के लिए खोला खजाना, मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी नई रफ्तार
Overview

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट सेक्टर के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत **₹5,939.87 करोड़** की भारी भरकम राशि आवंटित की गई है। यह आवंटन देश में एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूत करने की सरकार की मंशा को दर्शाता है।

ऑटो मैन्युफैक्चरिंग को सरकारी सहारा जारी

सरकार ऑटो मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है। बजट 2026-27 में ऑटो और ऑटो कंपोनेंट सेक्टर के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम में ₹5,939.87 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह आवंटन देश की डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाने, विशेष रूप से एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) के क्षेत्र में, सरकार के निरंतर समर्थन का प्रमाण है। बता दें कि वित्त वर्ष 25-26 के लिए रिवाइज्ड अनुमान ₹2,091.26 करोड़ था, जबकि वित्त वर्ष 24-25 में इस स्कीम के तहत ₹2,818.85 करोड़ आवंटित किए गए थे।

PLI स्कीम से सेक्टर में ग्रोथ और निवेश

ऑटो PLI स्कीम देश में एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने में महत्वपूर्ण साबित हुई है। डोमेस्टिक लेवल पर मैन्युफैक्चर किए गए एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (AAT) प्रोडक्ट्स की बढ़ी हुई बिक्री पर वित्तीय प्रोत्साहन देकर, इस स्कीम ने बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया है। सितंबर 2025 तक, स्कीम के तहत कुल निवेश ₹35,657 करोड़ तक पहुंच गया था, जिसने लगभग 48,974 नई नौकरियां पैदा करने में मदद की है। जीरो-एमिशन व्हीकल्स और उनके कंपोनेंट्स पर स्कीम का फोकस भारत को ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी ट्रेंड्स के साथ अलाइन करने और इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करने के लिए तैयार किया गया है।

कंपनियां उठा रही हैं इंसेंटिव और डिमांड का फायदा

स्कीम के शुरुआती लाभार्थियों में Mahindra & Mahindra और Tata Motors जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 24 के लिए इन कंपनियों ने सामूहिक रूप से लगभग ₹246 करोड़ के इंसेंटिव प्राप्त किए। इन इंसेंटिव्स और सेक्टर की ओवरऑल ग्रोथ का फायदा उठाते हुए, दोनों कंपनियों ने बाजार में मजबूत प्रदर्शन दिखाया है। उदाहरण के लिए, जनवरी 2026 में Mahindra & Mahindra ने 104,309 यूनिट्स की कुल वाहन बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल इसी अवधि की तुलना में 24% अधिक है। वहीं, Tata Motors की पैसेंजर व्हीकल बिक्री जनवरी 2026 में 47% बढ़कर 71,066 यूनिट्स हो गई, जबकि उनके कमर्शियल व्हीकल की बिक्री में 29.9% का इजाफा हुआ।

मार्केट कैप, P/E और सेक्टर का भविष्य

शुरुआती 2026 तक, Mahindra & Mahindra का मार्केट कैप लगभग ₹4.27 लाख करोड़ था, जिसका P/E रेश्यो करीब 30.0x था। Tata Motors का मार्केट कैप लगभग ₹1.28 लाख करोड़ था, और इसका P/E रेश्यो करीब 20.6x दर्ज किया गया था। भारतीय ऑटो सेक्टर में घरेलू मांग बढ़ने और एक्सपोर्ट में हुई वृद्धि के कारण व्यापक विस्तार देखा जा रहा है। हालांकि, हाल ही में EU के साथ संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत EU से इम्पोर्ट होने वाले वाहनों पर टैरिफ कम होने की रिपोर्टों ने बाजार में कुछ चिंता पैदा की है, जिसके चलते जनवरी 2026 के अंत में Mahindra & Mahindra और Tata Motors जैसे ऑटो स्टॉक्स में गिरावट देखी गई थी। इसके बावजूद, PLI फ्रेमवर्क का लोकलाइजेशन और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर जोर, घरेलू कंपनियों को इन दबावों से बचाने में मदद करेगा।

व्यापक बजटरी संदर्भ

ऑटो PLI स्कीम, बजट 2026-27 में उल्लिखित एक बड़ी इंडस्ट्रियल स्ट्रेटेजी का हिस्सा है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सोलर मॉड्यूल और एडवांस्ड बैटरी जैसे अन्य क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण आवंटन शामिल हैं। यह जोर भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने और इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करने की सरकार की मंशा को रेखांकित करता है, जिसमें ऑटोमोटिव इंडस्ट्री इस आर्थिक परिवर्तन का एक प्रमुख स्तंभ है।

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