InterGlobe Aviation यानी IndiGo के शेयर में पिछले दो दिनों में **5%** की तेजी आई है। शानदार रेवेन्यू ग्रोथ और ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, जबकि नई सरकारी गाइडलाइन्स पर भी नजरें टिकी हैं।
मुनाफे की ओर बढ़ते कदम
IndiGo ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के जो नतीजे पेश किए हैं, वे बाजार की उम्मीदों से बेहतर रहे हैं। कंपनी ने ₹1,879.1 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है, जो पिछले साल इसी तिमाही के ₹2,582.1 करोड़ के मुकाबले काफी कम है। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू साल-दर-साल आधार पर 25.9% बढ़कर ₹23,363.8 करोड़ पर पहुंच गया है। एयरलाइन की 'प्राइसिंग पावर' का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यील्ड्स (Yields) में 34% का उछाल देखने को मिला है।
फ्यूल कॉस्ट का दबाव और क्रूड ऑयल
इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती फ्यूल खर्च ही बनी हुई है, जो साल-दर-साल 67.2% बढ़कर करीब ₹10,000 करोड़ हो गया है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया नरमी ने एयरलाइन सेक्टर को थोड़ी राहत दी है, क्योंकि ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की कीमतें सीधे इसी से जुड़ी होती हैं। फिलहाल एनालिस्ट्स फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये की कमजोरी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
क्या बदलेगी नई रेगुलेटरी पॉलिसी?
नतीजों के अलावा बाजार की नजर सरकार के नए 'भारतीय वायुयान नियम, 2026' पर है। यह नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे, जो 1937 के पुराने नियमों की जगह लेंगे। इसमें एयरक्राफ्ट रजिस्ट्रेशन, सेफ्टी सर्टिफिकेट और लाइसेंसिंग जैसे अहम बदलाव शामिल हैं। इन्वेस्टर्स अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि ये नए मानक आने वाले समय में कंपनी के फिक्स्ड कॉस्ट स्ट्रक्चर और ऑपरेशंस पर कितना असर डालेंगे।
