Ice Make Refrigeration Share Price: ₹190 करोड़ जुटाएगी कंपनी, जापान की Galilei Holdings के साथ हुआ बड़ा सौदा

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AuthorMehul Desai|Published at:
Ice Make Refrigeration Share Price: ₹190 करोड़ जुटाएगी कंपनी, जापान की Galilei Holdings के साथ हुआ बड़ा सौदा

Ice Make Refrigeration लिमिटेड के निवेशक एक बड़ी खबर का इंतज़ार कर रहे हैं। कंपनी **₹190 करोड़** जुटाने की तैयारी में है। इस फंडरेज़िंग में जापान की मशहूर इन्वेस्टमेंट फर्म Galilei Holdings **₹180 करोड़** का निवेश करेगी। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपनी क्षमता बढ़ाने, कर्ज चुकाने और कमर्शियल रेफ्रिजरेशन के लिए एक नई ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) शुरू करने में करेगी। हालांकि, कंपनी ने Q1 FY27 में अच्छी रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है, लेकिन निवेशकों को बढ़ते नेट लॉस और घटते मार्जिन पर भी नज़र रखनी चाहिए।

Ice Make Refrigeration में निवेश का बड़ा मौका

Ice Make Refrigeration लिमिटेड को एक बड़ी पूंजी मिलने वाली है। जापानी इन्वेस्टमेंट फर्म Galilei Holdings ने इक्विटी शेयर्स के प्रीफरेंशियल इशू (Preferential Issue) के जरिए ₹180 करोड़ निवेश करने पर सहमति जताई है। अन्य निवेशकों से मिलने वाले योगदान को मिलाकर, कंपनी कुल ₹190 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इस पूंजी का इस्तेमाल कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने, पुरानी सुविधाओं के आधुनिकीकरण और मौजूदा कर्ज को कम करने में करेगी।

नई ज्वाइंट वेंचर (JV) की होगी शुरुआत

इस अहम रणनीतिक कदम के तहत, दोनों कंपनियां मिलकर Ice Make Horeca Private Limited नाम से एक नई ज्वाइंट वेंचर शुरू करेंगी। इसमें Galilei Holdings की 60% हिस्सेदारी होगी, जबकि Ice Make Refrigeration की 40% हिस्सेदारी रहेगी। यह नई कंपनी कमर्शियल रेफ्रिजरेशन प्रोडक्ट्स, जैसे कि अपराइट और टेबल रेफ्रिजरेटर के निर्माण, मार्केटिंग और वितरण पर फोकस करेगी। इस कोलैबोरेशन (Collaboration) का मकसद Galilei की इंडस्ट्री में विशेषज्ञता का फायदा उठाना और भारत में Ice Make की मौजूदा बाजार उपस्थिति को और मजबूत करना है।

कैसे रहे कंपनी के तिमाही नतीजे?

वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (30 जून, 2026 को समाप्त) के कंपनी के नतीजों से पता चलता है कि एक तरफ जहां कंपनी ने शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, वहीं मुनाफे (Profitability) को लेकर कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। पिछले साल की इसी तिमाही के ₹111.50 करोड़ की तुलना में, इस तिमाही में ऑपरेशन से रेवेन्यू 60.4% बढ़कर ₹178.88 करोड़ हो गया। इस मजबूत टॉप-लाइन परफॉर्मेंस के बावजूद, कंपनी को ₹1.65 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जो पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि के ₹1.47 करोड़ के लॉस से थोड़ा ज्यादा है।

मार्जिन पर दबाव और निवेशकों के लिए अहम बातें

मुनाफे पर दबाव कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margins) में साफ दिख रहा है। इस तिमाही में EBITDA मार्जिन लगभग 1.7% रहा, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह 4.1% था। मार्जिन में आई इस गिरावट के पीछे नए शुरू हुए एसेट्स (Assets) से बढ़ा हुआ डेप्रिसिएशन (Depreciation) और इनपुट कॉस्ट (Input Costs) में बढ़ोतरी जैसी वजहें शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी पर कर्ज से जुड़ा बढ़ता ब्याज भी निचले स्तर (Bottom Line) पर भारी पड़ रहा है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि कंपनी का शेयर इस समय अपने मौजूदा मुनाफे के मुकाबले प्रीमियम वैल्यूएशन (P/E Ratio) पर ट्रेड कर रहा है, जिसका P/E अनुपात लगभग 105 है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया फंड कैसे इस्तेमाल किया जाता है ताकि मुनाफे में सुधार हो और कर्ज कम हो।

कंपनी ने प्रीफरेंशियल इशू के लिए शेयरधारकों की मंजूरी लेने हेतु 19 अगस्त, 2026 को एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाई है। इसके अलावा, बाजार इस नई ज्वाइंट वेंचर के सफल एग्जीक्यूशन (Execution) पर भी नज़र रखेगा और देखेगा कि आने वाली तिमाहियों में कंपनी अपनी मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ को बेहतर मुनाफे और कैश फ्लो में कैसे बदल पाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.