ASK Automotive पर ICICI Securities का भरोसा! ₹750 का टारगेट, जानें तेजी के पीछे की वजह

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
ASK Automotive पर ICICI Securities का भरोसा! ₹750 का टारगेट, जानें तेजी के पीछे की वजह

ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनी ASK Automotive पर ब्रोकरेज फर्म ICICI Securities ने बड़ा दांव खेला है। फर्म ने 'Buy' रेटिंग के साथ शेयर के लिए ₹750 का टारगेट प्राइस तय किया है। यह कदम कंपनी के Q1 FY27 के मजबूत नतीजों के बाद आया है। हालांकि, बढ़तीcommodity लागत और ₹700 करोड़ की विस्तार योजना के जोखिमों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।

ICICI Securities का 'Buy' कॉल

आस्क ऑटोमोटिव (ASK Automotive) के शेयरों में ब्रोकरेज फर्म ICICI Securities की इनिशिएशन रिपोर्ट के बाद हलचल तेज हो गई है। फर्म ने कंपनी को 'Buy' रेटिंग दी है और शेयर के लिए ₹750 का टारगेट प्राइस रखा है। यह टारगेट 5 अगस्त, 2026 को जारी हुए कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजों के बाद आया है।

दमदार रेवेन्यू ग्रोथ, पर मार्जिन पर दबाव

कंपनी ने पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन दिखाया है। इस दौरान रेवेन्यू 52.1% बढ़कर ₹1,361 करोड़ हो गया। वहीं, नेट प्रॉफिट में 28.8% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹85 करोड़ तक पहुंचा। लेकिन, नतीजों के अंदरूनी आंकड़े बताते हैं कि कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ा है। EBITDA मार्जिन 12.0% रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 176 बेसिस पॉइंट्स कम है। इस गिरावट की मुख्य वजह एलॉय (Alloys) जैसी कमोडिटी की बढ़ती कीमतें हैं, जो कंपनी के लिए एक जोखिम का संकेत है।

₹700 करोड़ का विस्तार प्लान और आगे की राह

आस्क ऑटोमोटिव इस समय बड़े विस्तार की तैयारी में है। कंपनी ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) को बढ़ाकर करीब ₹700 करोड़ कर दिया है। इस पैसे का इस्तेमाल दक्षिणी भारत में एक नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी (Manufacturing Facility) बनाने में किया जाएगा। कंपनी कम मार्जिन वाले सेगमेंट, जैसे व्हील असेंबली (Wheel Assembly), से बाहर निकलकर अपने मुख्य और ज्यादा वैल्यू वाले ऑपरेशंस पर फोकस कर रही है।

ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि कंपनी कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी का कुछ बोझ ग्राहकों पर डाल सकती है और टू-व्हीलर (Two-wheeler) व पैसेंजर व्हीकल (Passenger Vehicle) सेगमेंट में अपनी मार्केट हिस्सेदारी बढ़ा सकती है। हालांकि, ₹700 करोड़ के इस बड़े निवेश में एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) भी है। नई फैसिलिटी की शुरुआत या संचालन में किसी भी तरह की देरी कंपनी के कैश फ्लो को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, कंपनी का बिजनेस टू-व्हीलर इंडस्ट्री की डिमांड साइकिल पर भी निर्भर करता है।

टू-व्हीलर्स में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) की अनिवार्य आवश्यकता जैसे रेगुलेटरी बदलाव (Regulatory Changes) भी इस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये बदलाव सेफ्टी कंपोनेंट्स (Safety Components) की मांग बढ़ा सकते हैं, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और लागत संरचना को जटिल भी बना सकते हैं। ऐसे में, निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी आने वाली तिमाहियों में अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे स्थिर रख पाती है और साथ ही अपनी विस्तार योजनाओं को कैसे पूरा करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.