हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) ने इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल बनाने वाली कंपनी यूलर मोटर्स (Euler Motors) में अपना निवेश बढ़ाया है। कंपनी ने हरियाणा के पलवल में एक नई प्रोडक्शन लाइन का उद्घाटन किया है। वहीं, यूलर मोटर्स ने **100%** से ज़्यादा रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन कंपनी को घाटा बढ़ रहा है और कॉम्पिटिशन भी तगड़ा है।
हीरो मोटोकॉर्प की EV स्ट्रेटेजी
हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) ने अपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) स्ट्रेटेजी को और मजबूत करते हुए यूलर मोटर्स (Euler Motors) की प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने में मदद की है। कंपनी के चेयरमैन पवन मुंजाल ने हाल ही में पलवल, हरियाणा स्थित यूलर मोटर्स के प्लांट में नई मैन्युफैक्चरिंग लाइन का इनॉगरेशन किया। इससे कंपनी की सालाना प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़कर 24,000 व्हीकल्स हो गई है। यह कदम हीरो मोटोकॉर्प के कमर्शियल इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की सोची-समझी रणनीति को दर्शाता है, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने पहले एथर एनर्जी (Ather Energy) को सपोर्ट किया था।
यूलर मोटर्स की बढ़त और चुनौती
हीरो मोटोकॉर्प फिलहाल यूलर मोटर्स में करीब 36% हिस्सेदारी रखती है। यह पार्टनरशिप सिर्फ फंड देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एग्जीक्यूटिव लेवल का सपोर्ट और हीरो के बड़े बिज़नेस नेटवर्क के साथ इंटीग्रेशन भी शामिल है। यूलर मोटर्स के लिए यह मददगार साबित हुआ है, जिसके चलते कंपनी ने अगस्त 2026 तक चार-पहिया इलेक्ट्रिक कार्गो सेगमेंट में करीब 28% मार्केट शेयर हासिल करने का दावा किया है।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस: ग्रोथ के साथ घाटा
फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजों को देखें तो ग्रोथ तो ज़बरदस्त है, लेकिन कॉस्ट प्रेशर भी साफ दिख रहा है। यूलर मोटर्स ने करीब ₹402 करोड़ का रेवेन्यू रिपोर्ट किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 110% ज़्यादा है। हालांकि, इस ग्रोथ की कीमत कंपनी को प्रॉफिट में चुकानी पड़ी है, क्योंकि नेट लॉस बढ़कर ₹308 करोड़ से ₹315 करोड़ के बीच पहुंच गया है। इस तरह के लॉसेस अक्सर आक्रामक तरीके से स्केल करने वाली स्टार्टअप कंपनियों में देखे जाते हैं, जहाँ कैपिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डीलरशिप नेटवर्क और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट में भारी निवेश किया जाता है।
कॉम्पिटिशन और सप्लाई चेन का रिस्क
इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर सेगमेंट में विस्तार ग्रोथ का नया रास्ता तो खोलता है, लेकिन यह सेक्टर तेज़ी से भीड़भाड़ वाला होता जा रहा है। यूलर मोटर्स को सीधे तौर पर टाटा मोटर्स (Tata Motors) और महिंद्रा इलेक्ट्रिक (Mahindra Electric) जैसे बड़े ऑटो प्लेयर्स से टक्कर लेनी पड़ रही है, जिनके पास भारी रिसोर्स और मौजूदा डिस्ट्रीब्यूशन चैनल हैं। यह कॉम्पिटिशन प्राइसिंग प्रेशर बढ़ा सकता है, जिससे नए प्लेयर्स के लिए प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
इसके अलावा, कंपनी सप्लाई चेन के मुद्दों के प्रति भी संवेदनशील बनी हुई है। सेमीकंडक्टर, कॉपर और एल्युमीनियम जैसे रॉ मैटेरियल्स की कीमतों में उतार-चढ़ाव से कॉस्ट प्रेशर बना हुआ है, जो सभी इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक चुनौती है। निवेशकों और मार्केट एनालिस्ट्स के लिए आने वाले क्वार्टर्स में यह देखना अहम होगा कि यूलर मोटर्स अपने कैश बर्न को कैसे मैनेज करती है और क्या वह बढ़ी हुई प्रोडक्शन कैपेसिटी का इस्तेमाल करके यूनिट इकोनॉमिक्स को बेहतर बना पाती है और इस कॉम्पिटिटिव माहौल में अपने घाटे को कम कर पाती है।
