Hero, Ather, Greaves का EV सेगमेंट में जलवा! H1 2026 में बढ़ी मार्केट हिस्सेदारी, जानें निवेशकों के लिए क्या है खास

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Hero, Ather, Greaves का EV सेगमेंट में जलवा! H1 2026 में बढ़ी मार्केट हिस्सेदारी, जानें निवेशकों के लिए क्या है खास

भारत के इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन (EV) बाजार में H1 2026 में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Hero MotoCorp, Ather Energy और Greaves Electric Mobility जैसी कंपनियों ने मिलकर कुल बिक्री का **37%** हिस्सा अपने नाम किया है। इस दौरान EV की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर **8.5%** हो गई है, लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच निवेशकों को मार्जिन पर दबाव का खतरा भी देखना होगा।

क्या हुआ -

साल 2026 के पहले छह महीनों में भारतीय इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार की तस्वीर बदल गई है। अब तक कुछ ही कंपनियों का दबदबा रहने वाले इस बाजार में अब ज्यादा मैन्युफैक्चरर्स अपनी जगह बना रहे हैं। Hero MotoCorp, Ather Energy, Greaves Electric Mobility, River और BGauss जैसी कंपनियों ने मिलकर कुल 3,25,286 में से 1,90,054 यूनिट्स की बिक्री की। पिछले साल इसी अवधि में यह हिस्सेदारी 26% थी, जो अब बढ़कर 37% हो गई है। इससे साफ है कि बाजार अब कम केंद्रित होता जा रहा है।

परफॉरमेंस कैसा रहा -

Hero MotoCorp इलेक्ट्रिक सेगमेंट में एक बड़ी खिलाड़ी बनकर उभरी है। कंपनी की बिक्री पिछले साल के पहले छह महीनों के 34,379 यूनिट्स से बढ़कर इस बार 1,04,417 यूनिट्स हो गई, यानी तीन गुना से भी ज्यादा। यह कंपनी की EV रणनीति की सफलता को दिखाता है। वहीं, Ather Energy ने अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है और उसकी बिक्री करीब दोगुनी होकर 1,67,176 यूनिट्स तक पहुंच गई। Greaves Electric Mobility (Ampere ब्रांड) ने भी 65.2% की शानदार ग्रोथ दर्ज की, जो इंडस्ट्री की 51.4% की औसत ग्रोथ से कहीं ज्यादा है।

बाजार की चाल और प्रतिस्पर्धा का जोखिम -

इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में तेजी की मुख्य वजह ग्राहकों में बढ़ती जागरूकता और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का फायदा उठाना है। EV की बाजार हिस्सेदारी H1 2026 में बढ़कर 8.5% हो गई है, जो पिछले साल 6.6% थी। जून में यह आंकड़ा 10.5% तक पहुंच गया था।

लेकिन, यह बढ़ता दायरा निवेशकों के लिए दोधारी तलवार साबित हो सकता है। जैसे-जैसे बाजार में ज्यादा कंपनियां आएंगी, ग्राहकों को लुभाने की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इसके चलते कंपनियों को मार्केटिंग, डिस्काउंट या नेटवर्क विस्तार पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है, जिससे उनके मुनाफे (Profit Margins) पर दबाव आ सकता है। हालांकि, बिक्री में वृद्धि इंडस्ट्री की ग्रोथ के लिए अच्छी है, लेकिन निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या ये कंपनियां बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच मुनाफा भी कमा पाएंगी।

प्रतिस्पर्धा क्यों मायने रखती है -

पहले EV दोपहिया बाजार में बहुत कम कंपनियां थीं। Hero MotoCorp और Ather जैसी कंपनियों का आगे आना एक संतुलित माहौल बना रहा है। TVS Motor और Bajaj Auto जैसी स्थापित कंपनियों के लिए अब EV की बढ़ती मांग पर उनका एकाधिकार नहीं रहा। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या ग्राहकों के पास ज्यादा विकल्प होने से प्राइस वॉर (Price War) शुरू हो सकती है, जिसका असर सभी कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए -

आने वाली तिमाहियों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये ग्रोथ आंकड़े मार्जिन में अस्थिरता के बावजूद बने रहते हैं। निवेशकों को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए: कंपनियां उत्पादन बढ़ाने के साथ लागतों को कैसे मैनेज करती हैं, सरकारी सब्सिडी नीतियों में कोई बदलाव आता है या नहीं, और कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स को कैसे अलग बनाती हैं ताकि उन्हें भारी डिस्काउंट से बचना पड़े। जैसे-जैसे EV की बाजार हिस्सेदारी बढ़ती रहेगी, फोकस सिर्फ मार्केट शेयर बढ़ाने से हटकर मुनाफे की राह दिखाने पर आ जाएगा।

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