गुजरात में इलेक्ट्रिक वाहनों की धीमी रफ्तार: EV अपनाने में देश में 16वें नंबर पर, पॉलिसी और इस्तेमाल के बीच बड़ा गैप

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
गुजरात में इलेक्ट्रिक वाहनों की धीमी रफ्तार: EV अपनाने में देश में 16वें नंबर पर, पॉलिसी और इस्तेमाल के बीच बड़ा गैप

गुजरात, जो एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब है, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने में अभी भी काफी पीछे है। राज्य के कुल वाहन बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी सिर्फ **1.36%** है, जिसके चलते NITI Aayog के EV मोबिलिटी इंडेक्स 2024 में गुजरात **16वें** स्थान पर आया है।

मैन्युफैक्चरिंग हब का धीमा EV सफर

गुजरात, जो अपनी औद्योगिक ताकत के लिए जाना जाता है, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने की दौड़ में उम्मीद से धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कुल 2.92 करोड़ रजिस्टर्ड वाहनों में से मात्र 3,98,582 यानी 1.36% ही इलेक्ट्रिक वाहन थे। पेट्रोल और डीजल वाहनों पर भारी निर्भरता EV को बड़े पैमाने पर अपनाने में एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

इस धीमी रफ्तार के कारण NITI Aayog के 'इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2024' में गुजरात को 16वां स्थान मिला है। राज्य को 42 अंकों का समग्र स्कोर प्राप्त हुआ, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग में मजबूती दिखी, लेकिन कंज्यूमर अडॉप्शन और कमर्शियल इस्तेमाल में कमी साफ नजर आई।

पॉलिसी और इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच खाई

गुजरात सरकार ने 2021 में 'गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी' लॉन्च की थी, जिसका मकसद राज्य को EV मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना था। सब्सिडी और इंसेंटिव के जरिए इस पॉलिसी ने बिक्री बढ़ाने में मदद की और शुरुआती टारगेट को पार भी किया।

हालांकि, यूजर्स के लिए एक स्मूथ इकोसिस्टम बनाने में यह पॉलिसी चुनौतियों का सामना कर रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर, राज्य ने 2,789 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन जुलाई 2026 तक स्थापित किए हैं, जो इसे देश में 8वें स्थान पर लाता है। लेकिन, EV और चार्जर का अनुपात 24:1 है, जो बताता है कि चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता और पहुंच EV मालिकों की संख्या के हिसाब से अभी भी काफी नहीं है।

कमर्शियल सेगमेंट में पिछड़ रहा गुजरात

राज्य की इंडेक्स रैंकिंग गिरने का एक बड़ा कारण कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों का धीमा अपनाव है। बड़े शहरों में जहां ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक डिलीवरी वैन आम हो गई हैं, वहीं गुजरात में इस सेगमेंट में EV का इस्तेमाल बहुत कम देखने को मिला है। यह स्थिति तब और चिंताजनक है जब राज्य की पॉलिसी लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने पर जोर देती है। कमर्शियल बेड़े में बदलाव न आने से, जो आमतौर पर ज्यादा चलने वाले वाहन होते हैं, कुल EV पेनेट्रेशन पर एक 'सीलिंग' लग जाती है।

निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

बाजार के जानकारों के लिए, पॉलिसी सपोर्ट और वास्तविक यूजर अडॉप्शन के बीच का यह अंतर सबसे महत्वपूर्ण ट्रेंड है। मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव तो मौजूद हैं, लेकिन EV की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए अब कमर्शियल EV के इस्तेमाल में बढ़ोतरी और चार्जिंग नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना जरूरी होगा। आने वाली तिमाहियों में, राज्य की इंसेंटिव स्कीम्स में संभावित बदलाव, कमर्शियल EV के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, और लॉजिस्टिक्स व पब्लिक ट्रांसपोर्ट में EV बेड़ों के कन्वर्जन रेट्स पर निवेशकों की नजर रहेगी। गुजरात को व्यक्तिगत वाहनों की सब्सिडी से आगे बढ़कर, अपनी कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ट्रांसपोर्ट चेन में EV को गहराई से इंटीग्रेट करना होगा, तभी भविष्य में असली ग्रोथ देखने को मिलेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.