वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बड़ा फैसला लेते हुए हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग उपकरणों को अनिवार्य BIS सर्टिफिकेशन से छूट देने का ऐलान किया है। हालांकि, उन्होंने ऑटो कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिक लॉक जैसी सेफ्टी फीचर्स पर आत्म-नियमन (self-regulation) करने की सख्त हिदायत भी दी है।
मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी रफ्तार
सरकार का यह कदम 'मेक इन इंडिया' को नई ऊर्जा देने वाला है। अब तक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े हाई-टेक उपकरणों के लिए अनिवार्य BIS सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया एक बड़ी बाधा बनी हुई थी। इस छूट से कंपनियों की कंप्लायंस लागत कम होगी और प्रोडक्शन क्षमता को बढ़ाने में तेजी आएगी। यह बदलाव उन ऑटो-कंपोनेंट निर्माताओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जो आधुनिक डिजिटल वाहनों के लिए ग्लोबल पार्ट्स पर निर्भर हैं।
सेफ्टी पर कड़ी नजर
एक ओर सरकार नियमों को आसान बना रही है, तो वहीं दूसरी ओर पीयूष गोयल ने गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक ऑटो-लॉक और फ्लश डोर हैंडल्स पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्थितियों, जैसे आग लगने या बाढ़ जैसी परिस्थितियों में ये फीचर्स घातक साबित हो सकते हैं। मंत्री ने SIAM को निर्देश दिया है कि कंपनियां खुद से इन डिजाइन जोखिमों को ठीक करें, अन्यथा सरकार को कड़े नियम लागू करने पड़ेंगे, जिससे कंपनियों पर भविष्य में भारी लागत और रिकॉल (Recalls) का दबाव बढ़ सकता है।
ग्लोबल कॉम्पिटिशन की तैयारी
मंत्री ने भारतीय ऑटो कंपोनेंट कंपनियों को सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित न रहने की सलाह दी है। बीते 4.5 वर्षों में हुए 9 ट्रेड एग्रीमेंट्स का लाभ उठाते हुए कंपनियों को ग्लोबल वैल्यू चेन में अपनी जगह बनानी होगी। निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि कंपनियां कितनी जल्दी इस राहत का लाभ उठाकर अपनी लागत घटाती हैं और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए कितना R&D खर्च करती हैं।
