ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने 'Advanced Electrified Vehicles' (AEV) के लिए एक नई कैटेगरी बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस कदम से प्लग-इन हाइब्रिड और रेंज-एक्सटेंडेड वाहनों के लिए राह आसान होगी और CAFE-III एमिशन नॉर्म्स का पालन करना सरल हो जाएगा।
सरकार का यह प्रस्तावित फ्रेमवर्क भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक बड़े बदलाव की आहट है। अब तक सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ बैटरी-इलेक्ट्रिक वाहनों पर था, लेकिन अब इस नई पॉलिसी के जरिए हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को भी मुख्यधारा में लाया जा रहा है।
क्या है नई कैटेगरी का पैमाना?
प्रस्ताव के अनुसार, उन वाहनों को AEV माना जाएगा जिनमें कम से कम 15 kWh का बैटरी पैक होगा और जिन्हें बाहर से चार्ज (Off-board charging) किया जा सकेगा। यह परिभाषा पारंपरिक 'स्ट्रांग हाइब्रिड' गाड़ियों से अलग होगी, जो छोटी बैटरी पर चलती हैं और जिन्हें प्लग-इन नहीं किया जा सकता। यह बदलाव आने वाले CAFE-III एमिशन स्टैंडर्ड्स को ध्यान में रखकर किया जा रहा है ताकि ऑटोमेकर्स अपनी फ्लीट के कुल उत्सर्जन को कम कर सकें।
कंपनियों को क्या फायदा होगा?
JSW MG Motor और Mercedes-Benz India जैसी कंपनियां, जो पहले से ही प्लग-इन हाइब्रिड मॉडल पर काम कर रही हैं, उन्हें इस स्पष्टता से बड़ी राहत मिलेगी। सरकार इन वाहनों के लिए 'वॉल्यूम इन्सेंटिव्स' देने पर भी विचार कर रही है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलने वाली रियायतों के समान हो सकते हैं। इससे कंपनियों को अपने ग्रीन पोर्टफोलियो को विस्तार देने का मौका मिलेगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
अभी यह पूरा प्लान केवल एक प्रस्ताव (Proposal) है। 1989 के सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में बदलाव और कानूनी अधिसूचना (Notification) आना बाकी है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सरकार अंतर-मंत्रालयी परामर्श (Inter-ministerial consultations) के बाद क्या अंतिम फैसला लेती है। बाजार में प्रतिस्पर्धा और प्रोडक्शन कॉस्ट को बैलेंस करना ऑटो कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
