भारत ने चीन से जुड़े निवेश वाली ऑटो कंपनियों के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) आवेदनों पर काम शुरू कर दिया है। इसमें JSW MG Motor India और Tata AutoComp Systems जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जिन्हें अब सरकारी मैन्युफैक्चरिंग सपोर्ट का फायदा मिल सकेगा।
सरकारी नियमों में बड़ा बदलाव
भारत सरकार ने उन ऑटो कंपनियों के लिए PLI स्कीम के दरवाजे खोल दिए हैं, जिनका मालिकाना हक चीन से जुड़ा है। साल 2020 के बाद से सीमा पर तनाव के चलते पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश की कड़ी जांच हो रही थी, जिसके कारण कई आवेदन ठंडे बस्ते में चले गए थे। हालांकि, अब सुधरते राजनयिक रिश्तों के बीच इन कंपनियों को सुरक्षा मंजूरी मिल गई है और सरकार इनके आवेदनों पर तेजी से काम कर रही है।
किन कंपनियों को होगा फायदा?
इस फैसले का सबसे बड़ा असर प्रमुख ऑटो जॉइंट वेंचर्स पर पड़ेगा। JSW Group और चीन की SAIC Motor की साझेदारी वाली कंपनी JSW MG Motor India अब इंसेंटिव पाने की रेस में शामिल हो गई है। इसके अलावा, Tata AutoComp Systems की दो वेंचर कंपनियां, जो बीजिंग की Prestolite Electric और शंघाई की Air International के साथ मिलकर काम करती हैं, उन्हें भी मंजूरी मिलने की राह आसान हो गई है। ये कंपनियां इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए जरूरी ड्राइवट्रेन और क्लाइमेट कंट्रोल सिस्टम बनाती हैं, जो भारतीय EV मार्केट के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
PLI स्कीम और वित्तीय लक्ष्य
ऑटो सेक्टर के लिए 2021 में लॉन्च की गई इस PLI स्कीम का कुल बजट ₹25,938 करोड़ है। अब तक इंडस्ट्री में एक्सपेंशन पर ₹45,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश हो चुका है। सरकार इस फाइनेंशियल ईयर में करीब ₹4,000 करोड़ का इंसेंटिव बांटने की तैयारी में है। इन कंपनियों के शामिल होने से घरेलू वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा और सेक्टर अपने लॉन्ग-टर्म प्रोडक्शन टारगेट को आसानी से पूरा कर पाएगा।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों के नजरिए से यह कदम काफी पॉजिटिव है, क्योंकि सरकारी इंसेंटिव से कंपनियों की ऑपरेटिंग कॉस्ट घटेगी और मार्जिन में सुधार की उम्मीद बढ़ेगी। हालांकि, निवेशकों को अब यह ट्रैक करना चाहिए कि ये कंपनियां कितनी तेजी से अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाती हैं और सरकार के कड़े माइलस्टोन्स को कैसे पूरा करती हैं। मुनाफे के लिए इन प्रोजेक्ट्स का समय पर चालू होना सबसे जरूरी है।
