ग्लोबल टेंशन का असर, शेयर बाज़ार में भारी गिरावट!
27 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार एक बड़ी बिकवाली के दबाव में आ गया। भू-राजनीतिक तनावों, खासकर अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु बातचीत की विफलता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारी मात्रा में पैसा निकालने के कारण Sensex और Nifty में तेज़ी से गिरावट दर्ज की गई। Sensex, जो पिछले दिन मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ था, शुक्रवार को 0.66% लुढ़क कर 81,705 अंकों पर आ गया। वहीं, Nifty भी गिरकर 25,379.40 अंकों पर पहुँच गया। इस गिरावट ने घरेलू बाज़ार की चिंताओं को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक मैक्रो कंसर्न्स को मुख्य वजह बनाया।
Maruti Suzuki पर भी मंदी का साया, वैल्यूएशन पर सवाल!
इस व्यापक बाज़ार गिरावट का असर ऑटो सेक्टर की दिग्गज कंपनी Maruti Suzuki India पर भी देखा गया। कंपनी के शेयर 1.40% तक नीचे आ गए। बाज़ार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट न केवल बाज़ार की गिरती हुई भावना का नतीजा है, बल्कि Maruti Suzuki के ऊँचे वैल्यूएशन पर उठ रहे सवालों को भी उजागर कर रही है। 27 फरवरी 2026 तक, Maruti Suzuki का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 31.71 से 32.60 के दायरे में था, जो पैसेंजर कार इंडस्ट्री के औसत 28.78 से काफी ज़्यादा है। लगभग ₹4.7 से ₹4.78 ट्रिलियन के मार्केट कैप वाली इस कंपनी का वैल्यूएशन, Tata Motors के पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट (जिसका P/E करीब 9.63 और मार्केट कैप ₹1.31 ट्रिलियन है) की तुलना में काफी प्रीमियम पर है।
विश्लेषकों की राय बदली, भविष्य में चुनौतियाँ!
साल-दर-तारीख (Year-to-date) के हिसाब से देखें तो Maruti Suzuki में 10.20% की गिरावट आई है, जो Sensex के 3.90% के मुकाबले काफी ज़्यादा है। इसके अलावा, 12 जनवरी 2026 को विश्लेषकों ने कंपनी की 'Mojo Grade' को 'Buy' से बदलकर 'Hold' कर दिया था, जो नज़दीकी अवधि में स्टॉक की ग्रोथ पर अनिश्चितता का संकेत देता है। ऑटो इंडस्ट्री में फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए 3-6% की मामूली वृद्धि का अनुमान है, लेकिन इनपुट लागत और सप्लाई चेन की दिक्कतें बनी हुई हैं। कंपनी को ऊँचे वैल्यूएशन, कड़ी प्रतिस्पर्धा, और उत्पादन की बाधाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जो भविष्य में इसके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।