Gabriel India के शेयरों में आज भारी गिरावट देखी गई। कंपनी ने **₹3,166 करोड़** की दो बड़ी अधिग्रहण योजनाओं की घोषणा की है, जिसके चलते स्टॉक में लगभग **6%** की गिरावट आई है। इस डील में प्रमोटरों को शेयर जारी करना और नकद भुगतान दोनों शामिल है।
Detailed Coverage
HL Mando Anand और HL Klemove में हिस्सेदारी खरीद
Gabriel India ऑटो कंपोनेंट सेक्टर की एक जानी-मानी कंपनी है। 'प्रोजेक्ट जुपिटर' के तहत, कंपनी ₹3,166 करोड़ के दो बड़े सौदों के जरिए अपने पोर्टफोलियो को स्टीयरिंग, ब्रेकिंग और ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स में विस्तार करने की योजना बना रही है।
कंपनी HL Mando Anand India में 28.9% हिस्सेदारी खरीदेगी, जिसकी कीमत लगभग ₹2,231 करोड़ होगी। इस भुगतान का एक बड़ा हिस्सा, ₹1,881 करोड़, प्रमोटर इकाई Asia Investments Private Limited को नए शेयर जारी करके किया जाएगा। बाकी ₹350 करोड़ का भुगतान नकद में होगा। इस शेयर स्वैप के लिए फ्लोर प्राइस ₹1,305.89 प्रति शेयर तय किया गया है। HL Mando Anand, जो स्टीयरिंग और सस्पेंशन सिस्टम्स में माहिर है, ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में ₹5,886 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹358 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। इस सौदे के लिए फिलहाल रेगुलेटरी और शेयरहोल्डर की मंजूरी का इंतजार है।
इसके साथ ही, Gabriel India HL Klemove India में 29.99% हिस्सेदारी ₹935 करोड़ नकद में अधिग्रहित कर रही है। यह कंपनी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम्स (ADAS) और ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स पर फोकस करती है। यह डील Gabriel India के लिए एक स्ट्रेटेजिक कदम है, क्योंकि यह हाई-वैल्यू इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की ओर बढ़ रही है। इस सौदे के लिए फंड आंतरिक नकदी भंडार और नए ऋण के संयोजन से जुटाया जाएगा। इस ट्रांजेक्शन का पहला चरण सितंबर 2026 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है।
वित्तीय स्थिति और निवेशकों के लिए अहम बातें
यह अधिग्रहण कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों के साथ आए हैं। Gabriel India ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में रेवेन्यू में 18.9% की सालाना वृद्धि दर्ज की, जो ₹1,274 करोड़ रहा। हालांकि, प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिखा, जो इस तिमाही में 8.4% पर था। ऑपरेटिंग प्रॉफिट 7.4% बढ़कर ₹107 करोड़ हुआ, लेकिन प्रॉफिट ग्रोथ की दर रेवेन्यू ग्रोथ से पीछे रही, जो बढ़ती लागत का संकेत है।
निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि इन अधिग्रहणों के लिए लिए गए नए कर्ज का कंपनी की बैलेंस शीट पर क्या असर पड़ता है। नकदी और प्रमोटर शेयर अलॉटमेंट दोनों का उपयोग फंड को संतुलित करने का प्रयास दर्शाता है। हालांकि, इस विस्तार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी इन नई व्यावसायिक लाइनों को कितनी कुशलता से एकीकृत करती है और लाभप्रदता बनाए रखती है। आने वाले महीनों में रेगुलेटरी अप्रूवल की समय-सीमा, नकद घटक के लिए लिया गया वास्तविक ऋण, और क्या कंपनी इन नए निवेशों को अवशोषित करते हुए अपने मार्जिन में सुधार कर सकती है, ये मुख्य अपडेट्स होंगी जिन पर नजर रखी जाएगी।
