GP Petroleums ने अपने विस्तार की बड़ी योजना बनाई है। अफ्रीका और दुबई में नए कारोबार और ऑटोमोटिव लुब्रिकेंट सेगमेंट पर दांव लगाकर कंपनी **₹3,000 करोड़** के रेवेन्यू तक पहुंचने की तैयारी कर रही है। हाल ही में कंपनी के मुनाफे में **220%** का भारी उछाल दर्ज किया गया है।
आक्रामक ग्रोथ और स्ट्रैटेजी
कंपनी ने अपने कारोबार की दिशा बदलने के लिए डायरेक्टर दिलीप वासवानी के नेतृत्व में एक बड़ी रणनीति तैयार की है। GP Petroleums अब औद्योगिक लुब्रिकेंट्स पर अपनी निर्भरता कम करके ऑटोमोटिव मार्केट पर फोकस बढ़ा रही है। कंपनी का लक्ष्य सालाना रेवेन्यू को ₹3,000 करोड़ तक पहुंचाना है।
शानदार फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
ग्रोथ को गति देने के लिए कंपनी 'डुअल-ब्रांड' अप्रोच अपना रही है। जहाँ एक तरफ Repsol लाइसेंस के जरिए प्रीमियम सेगमेंट में Castrol और Valvoline जैसी कंपनियों को टक्कर दी जा रही है, वहीं iPOL ब्रांड के जरिए मास मार्केट पर कब्जा करने की योजना है। इस साल की पहली तिमाही (Q1 FY27) में कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है। रेवेन्यू ₹230.3 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 46% ज्यादा है, जबकि नेट प्रॉफिट 220% उछलकर ₹20.6 करोड़ पर पहुंच गया है। कामकाज के विस्तार के लिए कंपनी ने ₹130 करोड़ तक फंड जुटाने की भी मंजूरी दे दी है।
ग्लोबल विस्तार और डिजिटल दांव
कंपनी की नजरें इंक्यूबिट (Incubit) के जरिए अफ्रीका और दुबई में मौजूद एसेट्स पर हैं। नाइजीरिया और तंजानिया में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के साथ-साथ केन्या और युगांडा में फ्यूल रिटेल नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। कंपनी अपने फ्यूल स्टेशन नेटवर्क को 40 से बढ़ाकर 100 करने की तैयारी में है। कामकाज को आसान बनाने के लिए कंपनी AI और डिजिटल टूल्स का सहारा ले रही है ताकि बिना मैनपावर बढ़ाए ज्यादा काम किया जा सके।
निवेशकों के लिए चेतावनी
कंपनी पर कर्ज का दबाव कम है (पिछले साल नेट डेट ₹33 मिलियन थी), लेकिन निवेशकों को कुछ पहलुओं पर नजर रखनी चाहिए। लुब्रिकेंट और फ्यूल बिजनेस क्रूड ऑयल की कीमतों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं, जिसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ सकता है। मैनेजमेंट ने भी संकेत दिए हैं कि वर्तमान ऊंचे मार्जिन आने वाले समय में थोड़े नरम हो सकते हैं। निवेशकों के लिए अब ऑटोमोटिव लुब्रिकेंट के लिए तय 20,000 टन का वॉल्यूम टारगेट और अफ्रीका में फ्यूल स्टेशनों का रोलआउट सबसे महत्वपूर्ण होगा।
