पेट्रोल-डीजल की महंगाई बनी EV की वजह
भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसकी मुख्य वजह सिर्फ पर्यावरण प्रेम नहीं, बल्कि कुल मालिकाना लागत (total cost of ownership) है। अमेरिका-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ती अशांति के कारण कच्चे तेल के आयात पर असर पड़ा है। नतीजतन, कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसका सीधा असर भारतीय ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। इन बढ़ती कीमतों के कारण, इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV) अब केवल एक प्रीमियम विकल्प नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक और ईंधन- indipendente विकल्प बन गई हैं।
EV की पैठ में जोरदार उछाल
मई 2026 के आंकड़े इस बदलाव को साफ दिखाते हैं। पैसेंजर गाड़ियों में EV की पैठ बढ़कर 6.4% हो गई है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के 4% के मुकाबले काफी ज्यादा है। टू-व्हीलर सेगमेंट में यह आंकड़ा 9% से भी ऊपर निकल गया है।
Tata Motors पैसेंजर EV सेगमेंट में अपनी पकड़ बनाए हुए है। नए मॉडल्स लॉन्च होने के बाद कंपनी की बुकिंग पांच गुना बढ़ गई है। टू-व्हीलर मार्केट में TVS Motor, Bajaj Auto, और Ather Energy के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। TVS Motor बिक्री के मामले में आगे है, जबकि Ather Energy की बिक्री पिछले साल के मुकाबले दोगुनी हो गई है।
EV इंडस्ट्री के सामने चुनौतियाँ
EV को अपनाने की रफ्तार भले ही तेज हो, लेकिन सप्लाई चेन (supply chain) अभी भी कमजोर है। भारत अभी भी लिथियम-आयन सेल्स के लिए आयात पर निर्भर है, जिससे ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई में रुकावट का खतरा बना रहता है। पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की कमी भी एक बड़ी बाधा है, खासकर छोटे शहरों में।
Besides, कंपनियों को इनपुट लागत (input cost) बढ़ने का सामना करना पड़ रहा है, जो 300 से 400 बेसिस पॉइंट तक है। इस लागत को ग्राहकों पर डालने के लिए कंपनियों ने कीमतों में 1-2% की मामूली बढ़ोतरी की है, लेकिन इससे उनके मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। सरकारी सब्सिडी (जैसे PM E-DRIVE) पर निर्भरता भी भविष्य में लाभप्रदता (profitability) के लिए एक जोखिम पैदा कर सकती है।
भविष्य की राह
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि EV का दौर अब शुरुआती चरण से निकलकर बड़े पैमाने पर उत्पादन की ओर बढ़ रहा है। कंपनियां अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ा रही हैं। अब फोकस बैटरी प्रोडक्शन को लोकल बनाने और एडवांस्ड कनेक्टिविटी फीचर्स जैसे Level 2 ADAS को इंटीग्रेट करने पर है। भले ही छोटी अवधि में आर्थिक चुनौतियाँ ऑटो सेक्टर को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन EV सेगमेंट अपने कम ऑपरेशनल कॉस्ट (operational cost) के कारण इस दशक में भारतीय ऑटो इंडस्ट्री के लिए ग्रोथ का मुख्य इंजन बना रहेगा।
