Force Motors Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की तीसरी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, और आंकड़े चौंकाने वाले हैं. दिसंबर 2025 में खत्म हुई इस तिमाही में, कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 13% बढ़कर ₹2,155 करोड़ दर्ज किया गया. लेकिन असली धमाका EBITDA में देखने को मिला, जो 63% की शानदार ग्रोथ के साथ ₹401 करोड़ पर पहुंच गया. इसी का नतीजा है कि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 266% का बंपर उछाल आया और यह ₹403 करोड़ पर पहुंच गया. यह कंपनी का अब तक का सबसे मजबूत तीसरा क्वार्टर रहा है.
नौ महीनों के परफॉरमेंस की बात करें तो, रेवेन्यू 14% बढ़कर ₹6,583 करोड़ हो गया, जबकि EBITDA में 43% का इजाफा होकर यह ₹1,145 करोड़ पर पहुंच गया. प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 153% की जबरदस्त बढ़त के साथ ₹938 करोड़ रहा. कंपनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसने अपनी ज़ीरो-डेट (Zero-debt) बैलेंस शीट को बरकरार रखा है, जो मौजूदा आर्थिक माहौल में एक बड़ी ताकत है.
घरेलू बाज़ारों में, कंपनी के अर्बन (Urbania), ट्रैवलर (Traveller), गुरखा (Gurkha), मोनू बस (Monobus), और ट्रैक्स (Trax) जैसे प्लेटफॉर्म्स की डिमांड में 25% की बढ़ोतरी देखी गई. वहीं, एक्सपोर्ट (Export) में भी लाइट कमर्शियल व्हीकल्स, स्पेशल व्हीकल्स और यूटिलिटी व्हीकल्स की बिक्री 30% बढ़ी है.
ऑपरेशनल एफिशिएंसी का जलवा
Force Motors की यह मजबूत परफॉरमेंस इसकी शानदार ऑपरेशनल एफिशिएंसी को दर्शाती है. कंपनी का ट्रेलिंग ट्वेल्व मंथ्स (TTM) नेट प्रॉफिट मार्जिन लगभग 12.49% है, जो इंडस्ट्री एवरेज 8.68% से काफी बेहतर है. इसी तरह, 11.95% का ऑपरेटिंग मार्जिन भी इंडस्ट्री के 10.73% के औसत से ऊपर है.
कंपनी के शेयर का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) करीब 22.74 से 32.2 के बीच है, जो इसे अशोक लेलैंड (P/E ~34.84-42.5), महिंद्रा एंड महिंद्रा (P/E ~26.7-32), और टाटा मोटर्स (P/E ~29.55) जैसे प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में अधिक आकर्षक बनाता है. पिछले एक साल में, Force Motors के स्टॉक में लगभग 195% से 212% तक का ज़बरदस्त उछाल देखा गया है, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है. हाल ही में, बोर्ड में तीन इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति, जिसमें पूर्व राजनयिक गौतम बम्बावाले और पूर्व महाराष्ट्र चीफ सेक्रेटरी नितिन करीर शामिल हैं, कॉर्पोरेट गवर्नेंस को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है.
सेक्टर की मजबूती और सरकारी सपोर्ट
भारतीय ऑटोमोटिव सेक्टर में भी ज़बरदस्त तेजी देखी जा रही है. कमर्शियल व्हीकल्स (CV) की बिक्री के FY2026 तक प्री-पेंडमिक स्तरों को पार करने की उम्मीद है. इसकी वजह सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, GST रिफॉर्म्स और बढ़ी हुई रिप्लेसमेंट डिमांड है. यूनियन बजट 2026-27 में मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और सप्लाई-चेन रेज़िलिएंस पर जोर दिया गया है, जो ऑटो सेक्टर के लिए एक पॉजिटिव आउटलुक देता है.
Force Motors के खास तौर पर डिज़ाइन किए गए प्लेटफॉर्म्स, जो शेयर्ड मोबिलिटी, डिफेंस और एक्सपोर्ट के लिए इस्तेमाल होते हैं, इस सेक्टर की ग्रोथ का फायदा उठाने के लिए अच्छी पोजीशन में हैं. कंपनी का ट्रैवलर (Traveller) प्लेटफॉर्म अपने सेगमेंट में 70% से अधिक मार्केट शेयर के साथ लीड कर रहा है.
आगे की राह और स्ट्रैटेजिक पोजिशनिंग
मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशांत फिरोदिया का कहना है कि कंपनी इस फाइनेंशियल ईयर का समापन अब तक के सर्वश्रेष्ठ परफॉरमेंस के साथ करेगी. उन्हें खासकर इंट्रा-सिटी और इंटर-सिटी पैसेंजर मोबिलिटी में हेल्दी डिमांड दिख रही है. कंपनी का डाइवर्सिफाइड प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और एक्सपोर्ट में मज़बूत ग्रोथ आगे की राह को और बेहतर बनाते हैं. सरकार की नीतियों से भारतीय इकोनॉमी के फंडामेंटल्स का लगातार मज़बूत होना भी इस उम्मीद को बल देता है. Force Motors की स्ट्रैटेजिक पोजिशनिंग, सॉलिड फाइनेंशियल हेल्थ और ऑपरेशनल एफिशिएंसी इसे भारतीय ऑटोमोटिव और कमर्शियल व्हीकल सेक्टर में आने वाली ग्रोथ का फायदा उठाने के लिए एक बढ़िया जगह पर रखती है.
