भारतीय ऑटो मार्केट में फेस्टिव सीजन के दौरान बिक्री में रुकावट देखने को मिल रही है। अभी भी **33%** ग्राहक अपनी कार चुनने के लिए कशमकश में हैं। डिमांड तो बनी हुई है, लेकिन खरीदार अब सेफ्टी और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे खरीदारी में देरी हो रही है।
फेस्टिव सीजन की शुरुआत के साथ ही पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री में खरीदारों के व्यवहार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि शोरूम्स में पूछताछ (enquiries) काफी हो रही है, लेकिन वे सेल्स में तब्दील नहीं हो पा रही हैं। Grant Thornton Bharat की हालिया रिपोर्ट बताती है कि 33% संभावित खरीदार अभी भी सोच-विचार के दौर में हैं, जिसका असर फेस्टिव सेल्स की रफ्तार पर पड़ सकता है।
ग्राहकों की नई प्राथमिकताएं
अब ग्राहकों के लिए सिर्फ कीमत ही मायने नहीं रखती। सर्वे के मुताबिक, 57% ग्राहक सबसे पहले सुरक्षा (Safety) को देख रहे हैं, जबकि 51.6% के लिए फ्यूल एफिशिएंसी महत्वपूर्ण है। प्राइस-सेंसिटिव बाइंग अब दूसरे नंबर पर (47.2%) खिसक गई है।
हाइब्रिड का जलवा
प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी में भी बड़ा बदलाव आया है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (22.8%) के मुकाबले हाइब्रिड टेक्नोलॉजी (37%) को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। निवेशक ध्यान दें कि जिन कंपनियों का फोकस सिर्फ प्योर ईवी (EV) पर है, उन्हें अब हाइब्रिड की ओर रुख करना पड़ सकता है।
जानकारी का अभाव (Knowledge Gap)
सेल्स की सुस्ती की एक और बड़ी वजह नियमों को लेकर कन्फ्यूजन है। 40.9% ग्राहकों को E20 फ्यूल से इंजन पर पड़ने वाले असर की चिंता है, वहीं केवल 32.6% लोग CAFE Phase III रेगुलेशंस के बारे में जानते हैं। यह जागरूकता की कमी ग्राहकों को खरीदारी टालने पर मजबूर कर रही है। अब कंपनियों के लिए यह बड़ी चुनौती है कि वे ग्राहकों को इन नए बदलावों के बारे में समझाएं, वरना डीलर्स के पास स्टॉक जमा होने का खतरा बढ़ सकता है।
