त्योहारी सीजन में गाड़ियों की बंपर डिमांड के बावजूद ऑटो कंपनियां इन्वेंटरी की किल्लत से जूझ रही हैं। Maruti Suzuki के पास **2,00,000** से ज्यादा पेंडिंग ऑर्डर्स हैं, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है कि क्या कंपनियां इस डिमांड को रेवेन्यू में बदल पाएंगी।
नवरात्रि से दिवाली तक का समय भारतीय ऑटो इंडस्ट्री के लिए सबसे अहम होता है, जो सालाना बिक्री का करीब एक-तिहाई हिस्सा इसी दौरान होता है। फिलहाल मांग तो मजबूत है, लेकिन डीलर्स के पास गाड़ियों का स्टॉक कम पड़ रहा है, जिससे सेल्स टारगेट पर असर पड़ सकता है।
Maruti Suzuki का चैलेंज
मार्केट लीडर Maruti Suzuki अभी 2,00,000 से ज्यादा पेंडिंग ऑर्डर्स के साथ संघर्ष कर रही है। कंपनी का डीलर इन्वेंटरी लेवल फिलहाल केवल 16 दिन की बिक्री के बराबर है, जो फेस्टिव सीजन के लिए जरूरी 1 महीने के टारगेट से काफी कम है। कंपनी की नई ऑटोमेटेड प्रोडक्शन लाइन्स अभी पूरी तरह स्टेबल नहीं हुई हैं, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी होगी क्योंकि यह इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही के आंकड़ों को प्रभावित कर सकता है।
कॉम्पिटिशन का रुख
इसके विपरीत, Hyundai Motor India की स्थिति थोड़ी बेहतर है, जिनके पास 4 से 5 हफ्ते की इन्वेंटरी है। कंपनी ने महाराष्ट्र के तालेगांव प्लांट में तीसरी प्रोडक्शन शिफ्ट शुरू की है ताकि फेस्टिव सीजन की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
क्या है आगे का आउटलुक?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि दूसरी छमाही में इंडस्ट्री की ग्रोथ घटकर 5% से 6% रह सकती है, क्योंकि पिछले साल का बेस काफी ऊंचा था। अब निवेशकों के लिए असली टेस्ट यह है कि कौन सी कंपनी कितनी तेजी से प्रोडक्शन बढ़ाकर शोरूम्स तक गाड़ियां पहुंचा पाती है। यदि सप्लाई चेन में दिक्कत बनी रहती है, तो बुकिंग कैंसिल होने का रिस्क बना रहेगा।
